फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

New Delhi Railway Station Stampede: रेलवे बता रहा आधा सच, बुनियादी नियमों को किया दरकिनार; क्या बोले विशेषज्ञ?

Tue, 18 Feb 2025 04:19 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मुसाफिरों का दबाव एक ही रूट पर है तो रेलवे को फॉलो मी योजना पर काम करना होता है। नियमों को नजरअंदाज करने से नतीजा हादसे के तौर पर आता है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा भी इसी तरह के कुप्रबंधन का नतीजा रहा है।
विज्ञापन
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसे को विशेषज्ञ रेल प्रशासन नाकामी मान रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल भीड़ का कायदे से प्रबंधन न हो पाना रहा। वहीं, रेल प्रशासन की तरफ से मिलने वाली जानकारी भी आधी-अधूरी बताई जा रहा है।

विज्ञापन
Trending Videos

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मुसाफिरों का दबाव एक ही रूट पर है तो रेलवे को फॉलो मी योजना पर काम करना होता है। नियमों को नजरअंदाज करने से नतीजा हादसे के तौर पर आता है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा भी इसी तरह के कुप्रबंधन का नतीजा रहा है। अमर उजाला संवाददाता नवनीत शरण ने इस मसले पर रेलवे के विशेषज्ञों से बात की। विशेषज्ञों की नजर में हादसा....

नहीं लागू की फॉलो मी योजना
जब भीड़ बढ़ने का अंदेशा रहता है तो ले-आउट डायग्राम बनाया जाता है। स्टेशन पर वार रूम बनाया जाता है। अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरा लगाए जाते हैं। यह देखने वाली बात है कि नई दिल्ली स्टेशन पर कंट्रोल रूम कहां बनाया गया था। इसका विस्तृत अध्ययन होना चाहिए। हजार-पांच हजार की जगह एक लाख लोग पहुंच जाए, तो भगदड़ होना ही है। इसमें या तो बने-बनाए मानकों की अनदेखी हुई या कोई अन्य दबाव रहा होगा। वॉर रूम का फेल्योर तो है ही। दूसरी बात यह है कि ट्रेन का प्लेटफार्म क्यों बदला गया। ट्रेन की उद्घोषणा हुई तो क्या वहां वालंटियर तैनात किए गए थे, जो यात्रियों को दिशा-निर्देश दे सके।  -राजेश अग्रवाल, रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य, रोलिंग स्टॉक

पूरी जानकारी दे रेलवे
नई दिल्ली स्टेशन के हादसे पर रेल प्रशासन आधा सच बता रहा है। जब भीड़ को देखते हुए अनारक्षित स्पेशल ट्रेन चलाने की उद्घोषणा की गई तो क्या रेलवे को पता नहीं था कि अनारक्षित टिकट लेकर सफर करने वालों की संख्या ज्यादा होगी और वह समूह में आगे बढेंगे, जिसे नियंत्रित कर पाना मुश्किल होगा। स्वचालित सीढ़ी बंद नहीं की गई तो इससे भी रुकावट एक समस्या बढ़ी होगी। (सुधांशु मणि, पूर्व महाप्रबंधक इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री चेन्नई, लीडर वंदे भारत प्रोजेक्ट)
विज्ञापन

पहले के हादसे से क्यों नहीं लिया सबक
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पहले छठ महापर्व के दौरान भी ऐसा ही हादसा हुआ था। उसके बाद से रेलवे त्यौहारों के दौरान स्टेशन के बाहरी हिस्सों में भीड़ को रोकने की व्यवस्था करता है। आखिर कुंभ पर उमड़ने वाली भीड़ को लेकर तैयारी क्यों नहीं की गई।  कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) समेत रेलवे की कई कमेटियां पहले ही इसे लेकर रिपोर्ट दे चुकी है। पर्याप्त सुरक्षाकर्मी क्यों नहीं थे इसकी जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें