ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कुछ बड़े प्रोजेक्टों का कार्य कराने वाले ब्रजपाल राठी की पोपलेन मशीनें भी शाहबेरी गांव में राहत और बचाव कार्य में लगी हुई थीं। उन्होंने बताया कि यहां मलबे में पिलरों में करीब 12 एमएम का सरिया लगा हुआ था जबकि छह मंजिल की इमारतों के पिलरों में 20 एमएम का सरिया लगना चाहिए था, जिसमें कोताही कर लोगों को मौत की नींद सुला दिया गया।
उन्होंने बताया कि निर्माण सामग्री में सीमेंट के उपयोग में भी बेहद कंजूसी दिखाई गई। सीमेंट और मौरंग में एक और चार का अनुपात होना चाहिए था तो बिल्डिंग बनाने वाले ने इसका अंतर एक के अनुपात दस से भी अधिक कर दिया जिससे इमारत गिर गई।
शाहबेरी में गिरने वाली दो बिल्डिंग के बीच में केवल 12 फीट का रास्ता था। मलबा हटने के बाद यह स्थिति साफ हो सकी है। जबकि, इससे पहले कयास लगाए जा रहा था कि दोनों बिल्डिंग साथ-साथ बनी थी। मामले की जांच कर रहे अधिकारी अगले दो दिन में अपनी रिपोर्ट एडीएम को सौंपेंगे। बिल्डिंग गिरने की जांच एडीएम प्रशासन को सौंपी गई है। शुक्रवार को दोनों बिल्डिंग के मलबे को हटा दिया गया है।
जांच टीम के अफसरों ने बताया कि दोनों बिल्डिंग के बीच में 12 फीट चौड़ा रास्ता था। पुरानी बिल्डिंग की नीवं के बराबर में नाली बनी हुई है। अभी तक की जांच में पता चला है कि पुरानी बिल्डिंग का हिस्सा पहले गिरा था। हालांकि, रास्ते पर जो मलबा मिला है, उसकी जांच की जा रही है कि वह कौन सी बिल्डिंग का है। उन्होंने बताया कि जांच लगभग पूरी हो गई है। दो दिन के अंदर जांच रिपोर्ट एडीएम प्रशासन को सौंप दी जाएगी।