नोएडा कहने को नोएडा नो पावर कट जोन है, लेकिन उत्तर प्रदेश की शो विंडो कहे जाने वाले इस शहर के बिजली उपभोक्ताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ बिजली की महंगी दरों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ हर महीने 250 करोड़ रुपये राजस्व देने वाले करीब दो लाख उपभोक्ता कटौती से बेहाल हैं। उद्योगों को राहत की जगह आफत मिल रही है।आवासीय सेक्टरों व ग्रामीण इलाकों में कटौती की समस्या 12 महीने बरकरार रहती है।
औद्योगिक, व्यापारी और आवासीय संगठनों से जुड़े लोगों की मानें तो आने वाले समय में हालात और ज्यादा बिगड़ने जा रहे हैं। जिस रफ्तार से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र का विकास हो रहा है, उसके मुताबिक अगले दो दशक में बिजली की मांग बढ़कर 6000 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। पावर कॉरपोरेशन 2031 के प्रस्तावित प्लान में इस बात की तस्दीक कर चुका है।
सबसे बड़ी चुनौती लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को पूरा करने की होगी, क्योंकि जिस रफ्तार से जिले में कंकरीट की इमारतें खड़ी हो रही हैं उसके लिए बिजली उत्पादन संयंत्र लगाना जरूरी होगा। लेकिन अब तक ऐसा कोई प्लान बनाने की जरूरत प्राधिकरणों ने नहीं समझी है।