नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक एसिड अटैक सर्वाइवर की याचिका पर केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उनकी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने और 2024 की अधिसूचना के अनुसार पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करे। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने इस मामले में याचिकाकर्ता को एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के तहत आवेदन करने की छूट देते हुए कहा कि आवेदन पर बिना किसी देरी के विचार किया जाए।
याचिकाकर्ता ने बताया कि उनकी एक आंख में पहले से ही 30% स्थायी दिव्यांगता प्रमाणित है, लेकिन मार्च 2024 के संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार उनकी कुल दिव्यांगता कम से कम 70% होनी चाहिए। उन्होंने यूडीआईडी पोर्टल पर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने का प्रयास किया, लेकिन पोर्टल में ऐसा विकल्प उपलब्ध नहीं होने से समस्या उत्पन्न हुई। केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जून 2024 का एक एसओपी जारी किया गया है, जिसमें पुनर्मूल्यांकन के लिए पहले मौजूदा यूडीआईडी कार्ड सरेंडर करना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि इस प्रक्रिया में 6 महीने तक लग सकते हैं और फिर कार्ड जारी होने में अतिरिक्त 6 महीने लग सकते हैं।अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एसओपी के अनुसार आवेदन कर सकती हैं और यदि ऐसा करती हैं तो उनकी अर्जी पर त्वरित निर्णय लिया जाए, बिना किसी अनावश्यक विलंब के। मामले को इसी आधार पर निस्तारित कर दिया गया।