सफदरजंग अस्पताल की ओपीडी पहुंचने पर सबसे ज्यादा मरीजों की भीड़ डॉक्टरों के कक्ष के बाहर और जनऔषधि व अमृत स्टोर पर देखने को मिली। जनऔषधि केंद्र पर मौजूद पीतमपुरा निवासी राजकुमार यादव ने बताया कि उनकी पत्नी अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने जो दवाइयां लिखी हैं उनमें से एक दवा मिली है।
बाकी बाहर से लेने के लिए बोल रहे हैं। करीब सात दवाएं डॉक्टर ने लिखी थी। उन्होंने ये भी बताया कि अस्पताल में उन्हें पिछले दो दिन में कहीं भी फ्री दवाओं का काउंटर नहीं मिला है। ओपीडी के भूतल पर खड़े दरियागंज निवासी अहमद बताते हैं कि वे महीने में दो बार यहां आते हैं। इलाज से लेकर अब तक करीब 8 महीने से वे यही समस्या देख रहे हैं।
कई बार कर चुके हैं शिकायत
सफदरजंग अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश का कहना है कि अस्पताल में दवाएं न मिलने के कारण मरीज डॉक्टर की लापरवाही समझते हैं, पर यह प्रबंधन का काम है। दवाएं न मिलने के कारण मरीज और उसके परिजन कई बार डॉक्टरों से विवाद करते हैं। इसकी शिकायत कई बार प्रबंधन को कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई ही नहीं होती। ठीक इसी तरह की परेशानी एम्स के डॉ. विजय गुर्जर सहित कई डॉक्टरों ने साझा की। उन्हें अक्सर ओपीडी में मरीज भी इसकी शिकायत करते हैं। 100 रुपये का कोई इंजेक्शन बाहर से मरीज को 250 से 300 रुपये में खरीदना पड़ रहा है।
दोनों ही अस्पतालों में कहीं नहीं दिखा शिकायत केंद्र
पड़ताल के दौरान मरीजों को होने वाली अव्यवस्थाओं को लेकर एम्स और सफदरजंग अस्पताल में कहीं भी शिकायत केंद्र के बारे में जानकारी नहीं मिली। जबकि दिल्ली सरकार के हर अस्पताल में जगह जगह बोर्ड लगे हुए हैं।