सिर में चोट लगने के बाद दिल्ली के धौला कुआं स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह की हालत गंभीर बनी हुई है। वह फिलहाल कोमा में हैं।
गुरुवार देररात घर में बाथरूम जाते वक्त फिसलकर गिरने से उनके सिर में गहरी चोट आ गई थी जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जसवंत सिंह को अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम में रखा गया है। डॉक्टरों ने शुक्रवार सुबह ही उनका ऑपरेशन करके सिर में जमा खून बाहर निकाला था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार दोपहर जसवंत सिंह को देखने आरआर हॉस्पिटल पहुंचे।
डॉक्टरों ने की जीवनरक्षक सर्जरी
भाजपा के दिग्गज नेता रहे 76 वर्षीय जसवंत सिंह को देखने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंचे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जसवंत सिंह के परिवार से फोन पर बात की और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी उन्हें देखने के लिए आरआर अस्पताल पहुंचे थे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जसवंत सिंह की हालत बेहद गंभीर है। डॉक्टरों की टीम लगातार उन पर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि जसवंत के सिर में चोट का इलाज करने के लिए ‘डीकंप्रेसिव हेमीक्रेनिक्टोमी’ जीवनरक्षक सर्जरी की जा चुकी है।
नहीं हो सकी जसवंत की 'घर' वापसी
वाजपेयी सरकार में रक्षामंत्री रहे जसवंत सिंह ने इस साल लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को अलविदा कह दिया था। राजस्थान की वाडमेर सीट से टिकट न मिलने से नाराज जसवंत सिंह ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा था।
पार्टी ने उन्हें नाम वापस लेने की अपील की थी लेकिन जब वे नहीं माने तो उन्हें निष्काषित कर दिया गया।
हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें सामने आती रही हैं, लेकिन उनकी घर वापसी नहीं हो सकी।
जब विवादों में घिरे जसवंत सिंह
जनवरी 1938 में जन्मे जसवंत सिंह हमेशा भाजपा के सक्रिय नेता रहे हैं। पिछली एनडीए सरकार में उन्होंने रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्रालय तक की जिम्मेदारी संभाली थी।
2004 में सत्ता बदलने के बाद वह राज्यसभा में विपक्ष के नेता बने। साल 2009 में उनकी किताब में मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर की गई टिप्पणी के चलते पूरे देश में उनका विरोध हुआ।
इस किताब को लेकर इतना विवाद हुआ कि भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि एक साल बाद ही उनकी दोबारा घर वापसी हुई।