केंद्रीय कृषि मंत्री ने संबोधन पूरा किया तो मंच के नीचे बैठे हजारों किसान खड़े हो गए। उन्होंने दोनों हाथ उठाए और विरोध शुरू कर दिया। मंत्रियों पर जूता फेंका और दलाल तक कह डाला। किसानों का गुस्सा उसकी प्रमुख मांगें न माने जाने को लेकर था।
इस बीच एक किसान ने माइक थामा और बोला कि हम सभी किसान भाइयों को बताया जाए कि मुफ्त बिजली, स्वामीनाथ कमेटी की सिफारिश लागू करने व गन्ना भुगतान की मांग का क्या हुआ। इतना सुनते ही किसानों का आक्रोश बढ़ा तो पहले राकेश टिकैत और फिर भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत को कहना पड़ा कि भाइयों अभी उन्होंने (मंत्रियों ने) अपनी बात रखी है।
अभी हम यहां से चले थोड़ा ना गए। आप भरोसा रखो जब तक सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती आंदोलन खत्म नहीं होगा। इसके बाद लगा कि भाकियू का शीर्ष नेतृत्व मजबूती से किसानों की लड़ाई लड़ने के लिए खड़ा है।
उसके बाद माइक से घोषणा हुई कि चौधरी साहब ने आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है। इसके बाद साफ हो चला था कि अब भाकियू लंबी लड़ाई लडे़गा। सिर्फ सात मांगों को माने जाने से बात नहीं बनेगी।
मंगलवार देर रात को केंद्र सरकार ने किसानों को राजघाट जाने की इजाजत दे दी। उसके बाद एकाएक आंदोलन की रूपरेखा बदल गई। भाकियू नेतृत्व दिन में सात मांगों पर मिली सहमति के आधार पर ही आंदोलन वापस लेने को तैयार हो गया। ऐसे में एकाएक यात्रा पूरी कर आंदोलन वापसी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आंदोलन से जुड़े कुछ किसानों में चर्चा है कि आखिर ऐसी क्या विवशता थी कि आधी रात को आंदोलन वापस लेना पड़ा, जबकि किसान धरने पर बैठे थे। ऐसे में राजनीतिक विशेषज्ञ अचानक से आंदोलन खत्म किए जाने पर हैरत में हैं। जबकि किसान आंदोलन को लेकर कंधे से कंधा मिलाए खड़े थे।
बताया जा रहा है कि किसानों ने दिल्ली में किसान घाट जाने के बाद अपना आंदोलन इसलिए खत्म कर दिया क्योंकि कुछ मुट्ठीभर लोग गाजियाबाद में सीक्रेट जगह एक खास दूत से मिले। कहा जा रहा है कि इन लोगों की आधीरात की बातचीत के बाद ही किसानों का आंदोलन समाप्त हो गया।
बताया जा रहा कि 2 अक्तूबर के दिन किसान शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे। लेकिन उनमें से कुछ थे जो हिंसक थे और अन्य किसानों को भी उग्र होने के लिए उकसा रहे थे। इन्हीं लोगों ने सबसे पहले पुलिस बैरिकेडिंग के पास जाकर उसे तोड़ने का प्रयास किया जिसके बाद पुलिस ने पहले तो हल्के प्रेशर के साथ पानी की बौछार डालनी शुरू कीं जो बाद में तेज कर दी गईं।
इस तरह पुलिस को समझ आ चुका था कि 5000 पुलिसकर्मियों की मदद से वो 25000 हजार किसानों को नहीं रोक सकते। स्थित को भांपते हुए तुरंत मौके पर पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक पहुंचे। उन्होंने राकेश टिकैत और नरेश टिकैत से बातकर अन्य किसानों को समझाने को कहा। उनकी बात मानते हुए भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत मौके पर पहुंचे और किसानों को संबोधित किया। 5 मिनट की स्पीच ने असर जरूर किया लेकिन कुछ देर बाद ही वो बेअसर हो गया।
इसके बाद दिल्ली पुलिस और गाजियाबाद पुलिस व प्रशासन आपस में शाम 6 बजे से लेकर रात 11 बजे के बीच लगातार फोन पर फोन करते रहे। अंत में एक बैठक पर बात बन ही गई। नरेश टिकैत ने बीमार होते हुए भी गाजियाबाद के एक गेस्ट हाउस में होने वाली इस बैठक में आने की सहमति दे दी।
नरेश टिकैत को कहा गया कि ये आंदोलन खत्म करें और बात बन भी गई लेकिन जल्द ही पुलिस की खुशी काफूर हो गयी जब किसान दिल्ली स्थित किसान घाट पर अपनी श्रद्धांजलि देने की बात को लेकर अड़ गए। जब पुलिस को लगा कि बिना इस मांग को पूरा किए बात नहीं बनेगी तो आधी रात को किसानों को किसान घाट भेजने का निर्णय लिया गया।
3 अक्तूबर को अधिकतर किसानों को सुबह 5 बजे तक रेलवे स्टेशन और बस स्टैडों तक पहुंचाया जा चुका था। वहीं सुबह 7 बजे तक ज्यादातर एनएच 24 खाली कराया जा चुका था और दोनों ओर वाहनों की आवाजाही शुरू हो चुकी थी। कुछ किसान अपना ट्रैक्टर ठीक कराने के लिए जरूर रुक गए थे जो बाद में अपने घरों को चले गए।
कोई कुछ भी कह सकता है लेकिन सच्चाई यही है कि किसानों की मांगों को सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के सामने मजबूती के साथ रखा गया। उसी का असर है कि केंद्र की सरकार सात प्रमुख मांगों पर मानने को तैयार हो गई। रही बात मुफ्त बिजली की तो उसको लेकर गृहमंत्री ने सीएम योगी से बात भी की, जिस पर उन्होंने विचार करने का आश्वासन दिया है। इस बीच हमें यह भी देखना था कि किसान हमारे सात बीते 10 दिनों से चले आ रहे हैं। - राजेश चौहान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- भाकियू