अनलॉक-एक में मिली राहत के बाद भी बस और ऑटो में सफर करने वालों की तादाद काफी कम है। बॉर्डर खुलने के बाद संक्रमण से बचाव के लिए सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करने से भी कतरा रहे हैं।
सफर करने वालों में आवश्यक सेवाओं और रेलवे स्टेशन, बस अड्डा पहुंचने के लिए सार्वजनिक वाहनों को अपना रहे हैं। आलम यह है कि बसों में पीक आवर्स में भी 15 सवारी से अधिक यात्री शायद ही किसी बस में होते हैं।
कापसहेड़ा बॉर्डर पर खड़ी क्लस्टर बस के ड्राइवर रवि ने बताया कि सुबह के वक्त ड्यूटी जाने वाले अधिक होते हैं। लेकिन बस अड्डा तक 15-16 यात्री से अधिक नहीं होते हैं। डीटीसी बस के एक कंडक्टर ने भी बताया कि बसों का परिचालन भले ही शुरू हो गया है, लेकिन अभी भी काफी कम लोग ही यात्रा कर रहे हैं।
हजारों की संख्या में लोग अपने गांव चले गए हैं, ऐसे में बसों में केवल जरूरी कार्यों के सिलसिले में ही कुछ लोग बाहर निकल रहे हैं। पैसेंजर न मिलने से ऑटो चालक भी परेशान हैं। ऑटो चालक कमलेश और सुल्तान ने बताया कि सुबह से शाम तक दो से तीन सौ रुपये तक की कमाई होती है।
यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए मिली छूट का भी कोई फायदा नहीं मिल रहा है, क्योंकि अधिकतर लोग या तो खुद के वाहन का इस्तेमाल कर रहे हैं, अन्यथा बस या पैदल सफर कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें भी चिंता सता रही है कि अपने जरूरी खर्च के लिए कमाई कैसे करें।