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निर्भया को मिला इंसाफ पर दिल्ली में ना लगे CCTV कैमरे, ना खत्म हुई अंधेरी जगह

Sat, 06 May 2017 05:26 PM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेत‌िक च‌ित्र - फोटो : demo
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दिल्ली में करीब साढ़े चार साल पहले दरिंदों की शिकार निर्भया को सुप्रीम इंसाफ मिला लेकिन तमाम सिफारिश और बजट प्रावधानों के बावजूद दिल्ली में ना तो सीसीटीवी कैमरे लगे और ना ही अंधेरी जगह पर तमाम हस्तक्षेप और उच्चस्तरीय बैठकों के बावजूद लाइट्स लग सकी हैं।
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बलात्कार पीड़िता को हर संभव मदद एक ही जगह पर मिल सके इसके लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर बनाए जाने थे, उसमें भी प्रगति नहीं हुई है। हालात यह है कि सार्वजनिक स्थल पर सीसीटीवी का बजट 2016-17 में खर्च नहीं हो पाया तो बसों में सीसीटीवी सिर्फ पॉयलट प्रोजेक्ट तक सिमटकर रह गया।

दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी लगाने के लिए वित्त वर्ष 2016-17 में 200 करोड़ रुपये का बजट रखा था जो चालू वित्त वर्ष में घटाकर 130 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
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लक्ष्य रखा गया है कि मार्च, 2018 तक 850 सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए जाएंगे। तो वहीं 40 करोड़ रुपये अंधेरी जगहों पर लाइट्स लगाने केलिए रखा गया है जिससे 7428 जगह लाइट्स लगेगी लेकिन विभाग ने साफ किया है कि इसमें बहुत कुछ एमसीडी की सड़कों पर एनओसी मिलने पर निर्भर करेगा।
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सिर्फ 200 बसों में सीसीटीवी कैमरे, बाकी के लिए कैबिनेट का फैसला तक नहीं

सांकेत‌िक च‌ित्र - फोटो : कुमार संजय
डीटीसी ने सीसीटीवी कैमरा अभी 200 बसों में पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया है जबकि बजट में 100 करोड़ रुपये सभी बसों के लिए रखा था। अब चालू वित्त्तवर्ष में 6350 डीटीसी व क्लस्टर बसों में तीन-तीन सीसीटीवी लगाने का लक्ष्य और 100 करोड़ रुपये का बजट रखा है।

लेकिन आउटकम बजट में ये कहीं नहीं लिखा कि इस एक साल में कितनी बसों में सीसीटीवी लग पाएगा। अभी तक इस पर कैबिनेट का फैसला तक नहीं हुआ है। निर्भया फंड से सीसीटीवी लगाने की सिफारिश केन्द्र सरकार की सक्षम समिति ने दी है लेकिन अभी केन्द्र सरकार से मंजूरी नहीं आई है।

डीटीसी बसों में ढूंढने से मिलते हैं मार्शल
में निर्भया की घटना 16 दिसंबर, 2012 को हुई जिसे करीब साढ़े चार साल गुजर गए। तभी अंधेरी जगह पर लाइट्स, सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी के अलावा डीटीसी बसों में मार्शल की तैनाती का फैसला हुआ था। सरकार ने सभी बसों में मार्शल लगाने का ऐलान भी किया लेकिन 900 होम गार्ड और 1300 सिविल डिफेंस की तैनाती की गई।

होम गार्ड के जवान चुनाव में हटाए गए जो अभी तक दिल्ली पुलिस के पास ही हैं। सिविल डिफेंस के 1300 वालिंटियर्स में तमाम छुट्टी पर रहते हैं। हालांकि डीटीसी अधिकारियों का दावा है कि नाइट शिफ्ट की बसों में 120 मार्शल तैनात रहते हैं। डीटीसी बसों की संख्या 3781 है जो दो-दो शिफ्ट में चलती हैं लेकिन मार्शल सिर्फ 1300 हैं। इसके अलावा मोहल्ला रक्षक दल के प्रोजेक्ट से सरकार ने हाथ खींच लिए हैं।

वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर को फंड का इंतजार
बलात्कार पीड़िता की सहायता केलिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर बनाए जाने थे। शुरुआत में कुछ जगह स्वास्थ्य विभाग ने बनाए थे लेकिन बाद में महिला एवं बाल विकास और उससे दिल्ली महिला आयोग को ये काम शिफ्ट हो गया। दिल्ली महिला आयोग एक भी सेंटर स्थापित नहीं कर पाया। दिल्ली महिला आयोग के प्रवक्ता भूपेन्द्र का कहना है कि केन्द्र सरकार से फंड नहीं मिला। इसके लिए आयोग ने केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भी लिखा है। फंड मिलने केबाद प्रस्ताव तैयार करने का काम भी विभाग का है।
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