दिल्ली के बाजारों में त्योहारों को लेकर जमकर खरीदारी हो रही है। बाजार इन दिनों देर रात तक गुलजार रहते हैं। हालांकि, इस बार ऑनलाइन शॉपिंग ने बाजारों की हालत थोड़ी खराब कर दी है। व्यापारियों की मानें तो बाजार में छोटे समान के खरीदार ज्यादा हैं।
रिटेल व्यापार ही नहीं, थोक व्यापार में भी उछाल नहीं है। एक आंकड़े के अनुसार, नवरात्र से दिवाली तक 60 हजार करोड़ रुपये का दिल्ली में व्यापार होता है, लेकिन यह घटकर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये रह गया है। उम्मीद है, दिवाली के दिन स्थिति में सुधार हो सकता है।
कपड़ा व्यापार पर भी मंदी की मार
त्योहारों में नए कपड़े पहनने का प्रचलन है। अमूमन, सौ करोड़ रुपये का कपड़े का व्यापार हर साल नवरात्र से दिवाली तक होता है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि इस व्यवसाय पर भी मंदी की मार है। दिल्ली हिंदुस्तान मर्केंटाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण सिंहानिया का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग ने व्यापार की कमर तोड़ दी है। इस साल 35 से 40 प्रतिशत व्यापार कम हुआ है।
त्योहारों के दौरान प्रतिदिन 8 से 10 करोड़ का व्यापार होता है, लेकिन इस साल बाजार में ग्राहक ही नहीं है। महासचिव मुकेश सचदेवा का कहना है कि करवाचौथ के दिन खुदरा बाजार में ग्राहक थे, जिससे व्यापार कुछ ठीक हुआ, लेकिन दिवाली को लेकर मार्केट में ज्यादा उत्साह नहीं है।
एक टन की जगह 75 किलो सोना बिकने का अनुमान
दिवाली के दिन सबसे बड़ी खरीदारी सोने-चांदी की होती है। धनतेरस के दिन लोग आभूषण भी जमकर खरीदते हैं। पिछले साल जहां चार टन के करीब चांदी बिकने का अनुमान ज्वेलर्स लगाए रहे थे तो इस बार ग्राहकों की कमी देख चिंतित हैं। द दिल्ली बुलियन ज्वैलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव प्रेम शर्मा का कहना है कि सोने की चमक इस साल फीकी है।
चांदी की जमकर खरीदारी तो हो रही है, लेकिन आभूषण की जगह लोग सिक्के, श्री गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्ति और गिफ्ट आइटम ही खरीद रहे हैं। व्यवसाय में इस साल 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है। धनतेरस पर व्यापार बढ़ने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रिक मार्केट में भी 30 प्रतिशत की गिरावट
दिवाली के दौरान घरों को सजाने के लिए इलेक्ट्रिक एलईडी लाइन का प्रचलन है। लोग दीए जलाने से बेहतर इन दिनों इलेक्ट्रानिक झालर लगाकर घरों को रोशन करते हैं। इसमें चीनी आइटम का दबदबा है, लेकिन इस बार व्यापारी इस व्यापार में भी मंदा बता रहे हैं।
हालांकि, इस आइटम की खरीदारी करने दिल्ली के बाजारों में लोगों की मौजूदगी कम नहीं है। सदर स्थित बारी बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा का कहना है कि बाजार से रौनक गायब है। खरीदारों की कमी है। 30 प्रतिशत खरीदारी कम हो रही है।
द कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स का अनुमान
ऑनलाइन कंपनियों के व्यापार के कारण इस साल व्यापार में काफी गिरावट आई है। हर साल 60 हजार करोड़ रुपये का दिल्ली में व्यापार होता है, लेकिन इस बार इसमें काफी कमी है। मोबाइल सेक्टर के व्यापार में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट है तो एफएमसीजी और कंस्यूमर ड्यूरेबल में 35 प्रतिशत की गिरावट है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सामान में 35 प्रतिशत, इलेक्ट्रिकल आइटम में 30 प्रतिशत, गारमेंट्स में 25 प्रतिशत, फुटवियर में 20, गिफ्ट आइटम्स में 35, फर्निशिंग सामान में 25, सजावटी सामान में 25, बिल्डिंग हार्डवयेर में पांच प्रतिशत, किचन इक्विपमेंट्स में 30 प्रतिशत, कंप्यूटर एवं कंप्यूटर के सामान में 30, किराना में 35, घड़ियों में 20, ब्यूटी एवं कॉस्मेटिक्स में 30, बैग एवं लगेज में 35, फिटनेस एवं स्पोर्ट्स गुड्स में 30, फैशन के कपड़ों में 40 प्रतिशत एवं खिलौनों में लगभग 30 प्रतिशत के व्यापार की गिरावट बताई जा रही है। सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन से जुड़े देव राज बावेजा का कहना है कि सदर बाजार में हर साल की तरह इस साल व्यापार काफी मंदा है।