राऊत ने दावा किया कि देश में ईपीएस 95 योजना से जुड़े करीब 81 लाख पेंशनर्स हैं, जिन्हें औसतन 1,171 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है। यह राशि वर्तमान महंगाई के दौर में जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है। एक बार पेंशन तय होने के बाद उसमें आजीवन कोई वृद्धि नहीं होती, जबकि आवश्यक वस्तुओं और इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पेंशनर दंपतियों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा नहीं होने से बुजुर्गों को गंभीर आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रेसवार्ता में समिति ने यह भी आरोप लगाया कि 4 अक्टूबर 2016 और 4 नवंबर 2022 को उच्च पेंशन के संबंध में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद पात्र पेंशनर्स को उसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। समिति के मुताबिक, इस संबंध में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, श्रम मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय सचिव रमेश बहुगुणा, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राजीव भटनागर और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बीएस नरखेड़े समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।