राजधानी की सड़कों और फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद हालात जस के तस हैं। इस आदेश को चार महीने पूरे होने वाले हैं, लेकिन निगम ने अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। ‘अमर उजाला’ के रियलिटी चेक में पता चला कि पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी तीनों निगम क्षेत्रों में अतिक्रमण लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
पूर्वी दिल्ली के व्यस्त इलाके लक्ष्मी नगर में मेट्रो स्टेशन के पास मेन रोड पर ही रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा दिखाई दिया। सर्विस लेन के दोनों ओर अवैध रेहड़ी वालों ने ऐसा कब्जा कर रखा है कि एक रिक्शा भी ठीक से आगे नहीं बढ़ सकता। पैदल लोगों के लिए बने फुटपाथ पर भी अतिक्रमण है। इस कारण लोगों को सड़क पर वाहनों के बीच पैदल चलना पड़ता है।
इससे वाहनों से टकराने का खतरा बना रहता है। लक्ष्मी नगर के आसपास के क्षेत्र शकरपुर, प्रीत विहार, गीता कॉलोनी पुश्ता, खुरेजी, शाहदरा, नंद नगरी, सीमापुरी, आनंद विहार और विवेक विहार आदि इलाकों में फुटपाथ और सड़कें अतिक्रमण से प्रभावित दिखाई दीं।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के तहत आसफ अली रोड पर तुर्कमान गेट से दिल्ली गेट तक सड़क पर वाहनों के अतिक्रमण से लोग परेशान दिखे। वाहनों की पार्किंग के कारण यहां सड़क छोटी हो गई है। इस अवैध पार्किंग के कारण यहां रोज भारी जाम का भी सामना करना पड़ता है। इसके बाद दरियागंज के मुख्य मार्ग पर दुकानदारों ने सामान फैलाकर फुटपाथों पर भी कब्जा किया हुआ है।
दरियागंज के रिहायशी इलाके में अंसारी रोड पर वाहनों की अवैध पार्किंग राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब है। यहां ट्रैफिक पुलिस के ‘नो हॉल्टिंग’ और ‘नो पार्किंग’ के बोर्ड तो हैं, लेकिन इन्हीं के आगे वाहन पार्क किए जाते हैं। साथ ही, जामा मस्जिद और लाल किले के आसपास की सड़कों के फुटपाथों पर अवैध रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा है।
लाल किले के सामने बने फुटपाथ पर अवैध वाहन पार्किंग बना ली गई है। इस निगम के कमला मार्किट, पहाड़गंज, आदर्श नगर, नांगलोई, मंगोलपुरी, रोहिणी, समयपुर बादली और करोल बाग समेत अन्य इलाकों में भी फुटपाथों और सड़कों पर अतिक्रमण है।
दक्षिणी दिल्ली नगर के तहत सरिता विहार मेट्रो स्टेशन के आसपास अवैध रेहड़ी-पटरी वालों, ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा का कब्जा दिखाई दिया। यहां लोगों के लिए पैदल चलने की भी जगह नहीं है। गोविंदपुरी में भी अतिक्रमण के कारण सर्विस लेन पर चलना मुश्किल है। उत्तम नगर के मुख्य मार्ग, ख्याला, हौजखास, हस्तसाल, छत्तरपुर, महिपालपुर, बदरपुर और नजफगढ़ समेत अन्य इलाकों में निगम अधिकारियों की मिलीभगत के कारण अतिक्रमण फैला है।
उल्लेखनीय है कि गत 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणविद् एमसी मेहता की अर्जी पर नगर निगमों को निर्देश दिया था कि वे 15 दिन के भीतर फुटपाथों से अतिक्रमण हटाएं, लेकिन चार महीने बीतने को हैं और अभी तक दिल्ली के किसी इलाके में अतिक्रमण पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखी है।
निगम ने अपने क्षेत्र से करीब 50 फीसदी अतिक्रमण हटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई। इसी बीच प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर स्टाफ को उसे कम करने के अभियान में लगाना पड़ा। अब वायु गुणवत्ता पहले से काफी बेहतर है। अब फिर से स्टाफ को अतिक्रमण हटाने में लगाया जाएगा। निगम के साथ ही अतिक्रमण हटाना पुलिस की भी जिम्मेदारी है।
- वर्षा जोशी, आयुक्त, उत्तरी दिल्ली नगर निगम
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम अतिक्रमण को हटाने के हर संभव प्रयास कर रहा है। जल्द ही सभी इलाकों से अतिक्रमण हटा दिया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के लिए हमारी टीमें काम कर रही हैं।
- राधाकृष्ण, जनसंपर्क अधिकारी, एसडीएमसी