दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के कचरेदान में नवजात शिशु रोता-बिलखता पाया गया। महज छह दिन की उम्र का नवजात खून से लथपथ अवस्था में भूख से तड़प के चलते जब रोने लगा तो आसपास के लोगों का हुजूम जमा हो गया।
आनन-फानन में मौके पर पहुंची डॉक्टरों की टीम ने बच्चे को कचरे से बाहर निकाला और आपातकालीन वार्ड में उसका उपचार शुरू किया। बृहस्पतिवार शाम तक अस्पताल प्रबंधन के पास शिशु की जानकारी उपलब्ध नहीं हुई।
शुक्रवार को अस्पताल के सभी सीसीटीवी कैमरों की जांच कर उक्त महिला का पता लगाया जाएगा। दरअसल, करीब साल भर पहले भी सफदरजंग अस्पताल में ऐसे ही एक शिशु मिला था, जिसे देर शाम उसकी मां की पहचान करने के बाद सौंप दिया गया था। वहीं, आरएमएल अस्पताल में भी पिछले वर्ष इस तरह की घटना देखने को मिली थी।
बृहस्पतिवार दोपहर करीब 1 बजे अस्पताल परिसर में मौजूद महिला शौचालय के बाहर रखे एक कचरेदान से बच्चे के रोने की आवाज सुनीं गई। जानकारी मिलने पर बालरोग और प्रसूति विभाग के डॉक्टर व नर्स मौके पर पहुंचे और बच्चे को बाहर निकाला।
इस दौरान सैकड़ों की संख्या में तिमारदारों की भीड़ जमा हो गई। मासूम की किलकारियां हर किसी के रोंगटे खड़ा कर दे रही थीं। आपातकालीन विभाग में उसे कुछ देर उपचार के बाद आईसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार, पिछले शुक्रवार को इस लड़के का जन्म हुआ है। उसके हाथ पर सीआर कोड नहीं मिला है। दरअसल, सीआर कोड अस्पताल में जन्मे सभी बच्चों के हाथ पर होता है, जिससे उसकी पहचान हो सके।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र शर्मा ने बताया कि कचरेदान में मिले शिशु की हालत अब खतरे से बाहर है। पूछताछ में पता चला है कि कोई महिला उसे वहां छोड़कर गई है, जिसका देर शाम तक सुराग नहीं लगा है। शुक्रवार को सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जाएगी। अगर पहचान नहीं हुई तो शिशु को बच्चा गोद लेने वाली एजेंसियों के हवाले कर दिया जाएगा।
डॉ. शर्मा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं वाकई चौंकाने वाली और शर्मिंदगी भरी होती हैं। शिशु को कौन और किन कारणों के चलते छोड़कर गया है? इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं, लेकिन मानवता हर परिस्थिति से बढ़कर होती है। ऐसे अपने शिशु को छोड़ना मानवता को शर्मिंदा करने जैसा है।