राजधानी में पारा चढ़ा तो बिजली संकट भी शुरू हो गया। उससे पहले सब्सिडी खत्म हुई और अब बिजली वितरण कंपनियों ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का भी आवेदन डीईआरसी में दाखिल कर दिया है।
बिजली वितरण कंपनियों में बीवाईपीएल ने सबसे अधिक 30 फीसदी वृद्धि की मांग की है, जबकि टाटा पॉवर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) ने 15 फीसदी व बीआरपीएल ने 14 फीसदी फ्यूल सरचार्ज की मांग की है।
दिल्ली में हर तीन महीने में बिजली खरीद की लागत घटने-बढ़ने के हिसाब से कंपनियां याचिका दाखिल करती हैं। जिस पर डीईआरसी फ्यूल सरचार्ज के नाम पर बिजली बिल पर एक निर्धारित प्रतिशत वसूली का आदेश जारी करता है। फरवरी, मार्च व अप्रैल के लिए तीनों कंपनियों को 6-8 फीसदी के बीच फ्यूल सरचार्ज वसूली को आदेश मिला हुआ था।
डीईआरसी में मंगलवार को बीआरपीएल और टीपीडीडीएल ने और बुधवार को बीवाईपीएल ने याचिका दी है। बिजली से जुड़े अधिकारी व विशेषज्ञ बता रहे हैं कि फ्यूल सरचार्ज वर्तमान केमुकाबले अधिक वसूली के आदेश डीईआरसी दे सकती है। हालांकि अभी आचार संहिता लागू है, इसलिए कुछ देरी भी हो सकती है।
पुराने प्लांट बंद करने का मामला डीईआरसी भेजेगी सरकार
दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों की मांग पर राजघाट और गैस टरबाइन पॉवर प्लांट बंद करने का मामला डीईआरसी को भेजने का फैसला किया है। डीईआरसी जो भी फैसला लेगी उसे सरकार मानेगी। उल्लेखनीय है कि बीएसईएस की यमुना पावर लिमिटेड ने राजघाट और गैस टरबाइन पावर प्लांट को बंद करने का आग्रह था।
एनटीपीसी के बदरपुर स्थित प्लांट की 95-95 मेगावाट की तीन यूनिट बंद करने में भी सरकार का फायदा बताया था। राजघाट व बदरपुर प्लांट का के कायले को अराबली बिजली संयंत्र भेजे जाने से बिजली का उत्पादन अधिक होगा।
तर्क दिया था कि इन प्लांटों को बंद करने से 770 करोड़ रुपये का फायदा होगा, जिसका सीधा असर बिजली कीमतों पर पड़ेगा। इसके अलावा सरकार की इन कंपनियों की बजाय बाहर से बिजली खरीदने की अनुमति मांगी थी।