चांदनी चौक में झूलते बिजली के तार किसी टाइम बम की तरह हैं और इस कारण लोगों की जिंदगी को खतरा है। अगर कोई हादसा होता है तो फायर ब्रिगेड व एंबुलेंस को जाने का रास्ता भी नहीं मिलेगा। यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने चांदनी चौक इलाके में अतिक्रमण के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए की है।
जस्टिस जीएस सिस्तानी व जस्टिस वी. कामेश्वर राव की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस व उत्तर दिल्ली नगर निगम को अतिक्रमण रोकने का निर्देश देते हुए यह टिप्पणी की है।
कोर्ट चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल की याचिका पर सुनवाई कर रही है। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। कोर्ट ने अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर निगम व पुलिस अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
कोर्ट ने कहा यह तार टाइम बम हैं। आप ऊपर नहीं देख सकते और आसमान साफ दिखाई नहीं देगा। सिर के ऊपर कई तार झूल रहे होते हैं। दुकानों के शटर पर भी बहुत से तार लटक रहे हैं।
हम लोग धरोहर की बात करते हैं लेकिन जमीनी हकीकत पर ध्यान नहीं देते। याची की ओर से अधिवक्ता संजीव रल्ली ने कहा कि अभियान चलाने का कोई फायदा नहीं हो रहा है।
सुबह वेंडर को हटाया जाता है और वह दोपहर को अपनी दुकानें लगा लेते हैं। कोर्ट के समक्ष उन्होंने ताजा फोटो पेश कर चांदनी चौक इलाके में अतिक्रमण के हालात से अवगत कराया, जबकि पुलिस ने अपनी फोटो पेश कर अतिक्रमण हटाने का दावा किया था।
कोर्ट ने कहा कि चांदनी चौक को नो वेंडिंग व नो हॉकर जोन बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि हटाने के बावजूद वेंडर व हॉकर वापस आ जाते हैं।