प्रदूषित हो रही साइबर सिटी की आबोहवा को साफ करने के लिए प्रदेश सरकार तैयारी कर रही है। डीजल ऑटो को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाया जाएगा। 2020 तक इसे अमल में लाने की योजना है। इसके लिए पर्यावरण विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
कई चरणों में यह प्रस्ताव अमल में लाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गुरुग्राम के किसी एक हिस्से से यह योजना की शुरुआत की जाएगी और धीरे-धीरे इसका विस्तार होगा। इस योजना को अमल में लाने के लिए पर्यावरण विभाग दूसरे निकाय हुडा, नगर निगम और जिला प्रशासन की मदद लेगा।
दरअसल, जिले में लगातार प्रदूषण का ग्राफ बढ़ रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के अध्ययन में साइबर सिटी में प्रदूषण का ग्राफ सामान्य से 10-13 गुना अधिक बताया गया है।
पेड़ों की कटाई और लगातार हो रहे बहुमंजिला इमारतों के निर्माण से शहर में धूल कण में भी इजाफा हो रहा है। जिसका असर लगातार इंसानों की सेहत के साथ परिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है। इमारतों के निर्माण से उड़ रही धूल के कारण आबोहवा में पीएम-2.5 की मात्रा में इजाफा हो रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग (सीपीसीबी) के आंकड़ों में गुरुग्राम देश के प्रदूषित शहरों में से एक हैं। यहां औसतन पीएम-2.5 की मात्रा 300 प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक होती है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पीएम-2.5 का सुरक्षित स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति क्युबिक मीटर और पीएम-10 का सुरक्षित स्तर 10 माइक्रोग्राम प्रति क्युबिक मीटर माना जाता है। अधिक होने की वजह से लोग कई तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए रोड मैप तैयार करने में जुटी हुई है।
2020 तक अमल में लाई जाएगी योजना
पायलट प्रोजेक्ट पर इस योजना की शुरुआत साइबर सिटी से की जाएगी। 2020 तक इसे अमल में लाने की योजना है। प्रथम चरण में किसी एक पॉकेट में शुरू कर और फिर इस पर फीडबैक आने के बाद अन्य जगहों पर लागू किया जाएगा। यदि गुरुग्राम में यह योजना सफल होती है तो एनसीआर के दूसरे शहरों में भी इस लागू किया जा सकता है।
सर्वे कराया जाएगा
साइबर सिटी में किस स्थान से कितने वाहन चलते हैं? वहां ऑटो की संख्या कितनी है और उन ऑटो पर सवारी करने वाले लोगों की संख्या कितनी है? इसके लिए पर्यावरण विभाग निजी एजेंसी से सर्वे कराया जाएगा। इसमें वैकल्पिक रास्ते और वाहनों की संख्या को लेकर जानकारी इकट्ठा की जाएगी, ताकि उतनी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहन उतारा जा सकें।
सीएनजी के तर्ज पर बनेंगे चार्जिंग स्टेशन
इलेक्ट्रिक वाहन उतारने से पहले जिले में सीएनजी स्टेशन के तर्ज पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए नगर निगम और हुडा से जमीन ली जाएगी। बिजली विभाग से इसके लिए सहयोग लिया जाएगा। हालांकि अभी इस पर अधिक चीजें तय होनी बाकी हैं।
केके खंडेलवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, पर्यावरण विभाग: प्रदूषण गंभीर मसला है। इसे देखते हुए पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण की बैठक हुई है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन चलाने का प्रस्ताव रखा गया था। इस पर अभी बहुत काम बाकी है।