आमिर के पिता शमशाद अली के मुताबिक, बचपन से ही आमिर को इलेक्ट्रिक उपकरण बेहद पसंद थे। सामान्य बच्चे खिलौनों से खेलते थे, लेकिन वे इलेक्ट्रिक उपकरण से खेलना पसंद था। आमिर के सवाल बेहद चौंकाने वाले होते थे, जो मुझे पता नहीं होते थे।
इसके चलते मैं उन सवालों का जवाब भी नहीं दे पाता था। आमिर ने 2014 में ही 12वीं पास कर ली थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्हें उस साल दाखिला नहीं मिल पाया। सात भाई-बहनों में आमिर दूसरे नंबर पर हैं। वर्ष 2015 में आमिर ने जामिया में डिप्लोमा प्रोग्राम में दाखिला लिया, वो भी कर्जे के पैसे से।
पिता की गिफ्ट कार को इलेक्ट्रिक चार्जिंग में की तब्दील
आमिर के पिता ने बताया कि घर के हालात ठीक नहीं थे, लेकिन कर्जा लेकर उन्होंने 50 हजार रुपये में पुरानी कार आमिर को दी। इसी मारुति 800 कार को आमिर ने इलेक्ट्रिक चार्जिंग कार में तब्दील कर दिया। आमिर की तकनीक जामिया प्रबंधन को भी बेहद पंसद आई और 29 अक्टूबर 2017 को आयोजित स्थापना दिवस कार्यक्रम में उसे प्रदर्शित किया गया।
तकनीक को देश ही नहीं दुनिया के इंजीनियर ने पसंद किया। जामिया के सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआइई) के तहत प्रोफेसर वकार आलम और सीआइई के सहायक निदेशक डॉ. प्रभाष मिश्र के नेतृत्व में इलेक्ट्रिक कार प्रोजेक्ट पर काम किया।