दिल्ली में पूर्ण बहुमत में आने के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने 67 में से 21 विधायकों को मार्च 2015 में संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त कर दिया। दिल्ली के ही एक वकील प्रशांत पटेल ने सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए इस पद को लाभ का बताते हुए राष्ट्रपति से शिकायत की।
वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति से इस मामले की शिकायत करते हुए सभी 21 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की। राष्ट्रपति ने इस मामले को चुनाव आयोग के पास भेज दिया।
हालांकि विधायक जरनैल सिंह के इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 हो गई जिनकी सदस्यता को लेकर चुनाव आयोग में याचिका दायर की गई। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने इन 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया।
इस बारे में संविधान के अनुच्छेद 102(1)(A) के अनुसार अगर कोई सांसद या विधायक लाभ के पद का उपयोग करता है तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। लाभ का यह पद केंद्र या राज्य सरकार किसी के भी अधीन हो सकता है।
1. प्रवीण कुमार
2. शरद कुमार
3. आदर्श शास्त्री
4. मदन लाल
5. चरण गोयल
6. सरिता सिंह
7. नरेश यादव
8. जरनैल सिंह
9. राजेश गुप्ता
10. अलका लांबा
11. नितिन त्यागी
12. संजीव झा
13. कैलाश गहलोत
14. विजेंद्र गर्ग
15. राजेश ऋषि
16. अनिल कुमार वाजपेयी
17. सोमदत्त
18. सुलबीर सिंह डाला
19. मनोज कुमार
20. अवतार सिंह