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10.4KG वजनी ट्यूमर की सफल सर्जरी: गैस समझकर चलता रहा इलाज, 80 वर्षीय महिला के पेट में पल रही थी जानलेवा गांठ

Mon, 19 Jan 2026 06:24 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

 दूसरे अस्पताल ब्लोटिंग और गैस मानकर महिला के पेट का उपचार कर रहे थे। वजह सामने आने पर सब कोई हैरान रह गया। गनीमत रही कि समस्या बढ़ने पर उसने दूसरे अस्पताल का रुख किया और वहां यह परेशानी पकड़ी गई।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI
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विस्तार
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दिल्ली के एक निजी अस्पताल में 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला के पेट से 50 सेंटीमीटर आकार और 10.4 किलोग्राम वजन का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला गया। महिला को पेट में पिछले दो वर्षों से पेट में सूजन (ब्लोटिंग) और कई दूसरी तकलीफ थी उसके बावजूद दूसरे अस्पताल महिला का उपचार गैस दूर करने की दवाओं से किया जा रहा था।

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पेट में तकलीफ अधिक बढ़ने पर बुजुर्ग महिला को ओखला स्थित नामी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया, जहां महिला की स्क्रीनिंग करने पर लिपोसारकोमा ट्यूमर के बारे में पता चला। यह दुर्लभ प्रकार का कैंसर फैटी टिश्यू में पनप रहा था। अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अर्चित पंडित के नेतृत्व में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. विनीत गोयल, डॉ. कुशल बैरोलिया सहित कई दूसरे डॉक्टरों ने मिलकर महिला का ट्यूमर निकालने में कामयाबी हासिल की। 

डॉ अर्चित पंडित ने बताया कि इतनी नाजुक अवस्था में किसी मरीज की सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ट्यूमर निकालने से ज्यादा चुनौती शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली को सुरक्षित बनाना और पुनर्निर्माण करना था। महिला का पेट ऐसे फूला हुआ था जैसे गर्भवती महिला का पेट हो। ट्यूमर की वजह से मरीज के गुर्दे, बड़ी आंत, मूत्राशय और गर्भाशय समेत कई महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव बढ़ गया था। सर्जरी बेहद सावधानी और सटीकता के साथ की गई। ट्यूमर को आसपास के अंगों से कांट-छांटकर अलग किया।
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उन्होंने कहा कि चिकित्सा इतिहास में अभी तक सबसे बड़ा आकार का लिपोसारकोमा 45 किलोग्राम वजन का दर्ज किया गया। लेकिन दस किलोग्राम से अधिक वजह के ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ होते है। सर्जरी के 12 दिनों के बाद मरीज को स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस मामले ने सर्जिकल टीम की दक्षता के साथ-साथ अस्पताल के कैंसर देखभाल कार्यक्रम की ताकत को भी रेखांकित किया है।
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