चीन से उठी आर्थिक मंदी की सुनामी दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को तकरीबन अपनी गिरफ्त में ले चुकी है। इससे साइबर सिटी का उद्योग जगत भी खासा घबराया हुआ है।
यहां के उद्योगों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर चीन, अमेरिका और यूरोप से 80 प्रतिशत कारोबार होता है। सोमवार को चीन और अमेरिका के शेयर बाजारों में सोमवार को आई भारी गिरावट का उद्योगों की ओर से आकलन किया जा रहा है।
उद्योगों का स्पष्ट मत है कि अगर आर्थिक उथल-पुथल का यह दौर लंबा चला तो हालत काफी खराब हो सकती है। अभी यह माना जा रहा है कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक टेंपरोरी (अस्थाई) फेज है।
जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा। मगर उद्यमियों का एक समूह ऐसा भी है जो यह कह रहा है कि सरकार को इस मंदी से उबरने के लिए ठोस इंतजाम करने होंगे। नहीं तो आगे स्थिति खराब हो सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरते भाव से परेशानी और बढ़ रही है।
ऑर्डर में आ सकती है कमी...
यहां करीब 3 हजार औद्योगिक यूनिटें हैं। इसके अलावा यहां 300 से अधिक कॉरपोरेट कार्यालय और 401 आईटी-आईटीईएस कंपनियां हैं। इन सभी का सबसे अधिक कारोबार अमेरिका, चीन और यूरोप से होता है।
गुड़गांव चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पीके जैन की राय में चीन की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। यही कारण है कि वहां के शेयर मार्केट में भारी गिरावट हुई है।
यह दौर लंबा चला तो गुडग़ांव की ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, लेदर गुड्स, सर्विस, मैन्यूफैक्चरिंग और गारमेंट इंडस्ट्री भी प्रभावित होगी। अगर दुनिया भर में आर्थिक हालात लगातार खराब होते रहे तो विदेशों से ऑर्डर कम हो जाएंगे।
अमेरिका और यूरोप जैसे देशों को गुडग़ांव से परिधान और लेदर गारमेंट का निर्यात किया जाता है। इसके अलावा आईटी निर्यात भी होता है। क्रिसमस और न्यू ईयर के लिए वहां से गारमेंट के आर्डर आना शुरू हुआ है। बीच में मंदी आने से इस पर विराम लग सकता है।
इन चीजों होता है आयात...
-इलेट्रॉनिक्स
-गैजेट्स
-प्लास्टिक
-मशीन और उपकरण
-केमिकल
-ऑटो कंपोनेंट
-कच्चा माल
(चीन और अमेरिका से)
निर्यात:
-ऑटोमोबाइल पार्ट्स
-सॉफ्टवेयर
-गारमेंट
-लेदर गुड्स
उद्यमियों की राय...
मंदी का असर कभी अच्छा नहीं होता। वर्तमान इस मंदी से दीर्घकाल स्थिति में नुकसान होगा। इससे उद्योगों की मुसीबत बढ़ सकती है। ...वीपी बजाज (अध्यक्ष जीआईए)
मंदी का यह अस्थाई फेज है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। देश की अर्थव्यवस्थ मजबूत है। अगर यह स्थिति लंबी चली तो गुडग़ांव के उद्योगों के प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जाता है। चीन से हम अधिक आयात और अमेरिका को निर्यात करते हैं।
...एसके आहूजा (महासचिव, गुडग़ांव चैंबर ऑफ कॉमर्स)
उद्यमी से लेकर कारोबारी तक को मंदी से हिला दिया है। सरकार को इससे निपटने के लिए ब्याज दरों में कमी करने के साथ जीएसटी को जल्द लागू करना चाहिए। नहीं तो स्थिति खराब हो सकती है।
...जेएन मंगला (मंगला स्टील्स कृति इंटरप्राइजेज)
इस मंदी का प्रभाव गुडग़ांव के ऑटोमोबाइल, गारमेंट, मैन्यूफैक्चरिंग, सर्विस सहित सभी प्रकार के उद्योगों पर पड़ेगा। कच्चे माल का आयात काफी महंगा हो जाएगा। चीन और यूरोप से सबसे अधिक आयात होता है।
...एचपी यादव (एनसीआर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री)