शराब पीकर वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण माना जाता है। मंगलवार सुबह भी एक युवक ने रिंग रोड के पास पुलिस की पीसीआर वैन में टक्कर मार दी, जिसमें दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल वजीर सिंह की मौत हो गई। पुलिस ने बताया है कि होंडा सिटी गाड़ी चला रहा युवक एक पार्टी से लौटकर वापस आ रहा था और उसने शराब पी रखी थी। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस साल शराब पीकर वाहन चलाने से हुई नौ दुर्घटनाओं में चार लोगों की मौत हो चुकी है।
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल, मई, जून और जुलाई के चार महीनों में इस साल 250 गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 261 लोगों की मौत हुई। कोरोना संक्रमण के कारण लगाए गये लॉकडाउन और उसके बाद भी लोगों की कम आवाजाही के कारण इस वर्ष ऐसी दुर्घटनाएं कम हुईं, जबकि इसके पिछले वर्ष यानी 2019 में इसी समयावधि के बीच 493 सड़क दुर्घटनाएं हुईं थीं, जिनमें 503 लोगों की जान गई थी।
शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण इस साल राजधानी में (31 जुलाई तक) 543 खतरनाक सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 557 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि पिछले वर्ष इसी समयावधि के दौरान इसी श्रेणी की 929 सड़क दुर्घटनाएं हुईं थीं, जिनमें 945 लोगों की मौत हुई थी।
क्या है सजा का प्रावधान
देश में प्रति वर्ष सड़क दुर्घटनाओं के कारण लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है। ऐसे 70 फीसदी मामलों में लोगों की मौत का कारण सिर में गंभीर चोट लगना पाया गया है। संशोधित मोटर वाहन अधिनियम 2019 के नियमों के मुताबिक शराब पीकर वाहन चलाते हुए पकड़े जाने पर पहली बार में 10 हजार रुपये जुर्माना और छह महीने की जेल या दोनों सजा दी जा सकती है। वहीं दोबारा अपराध करने पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड और दो साल की सजा हो सकती है।
नाबालिग द्वारा गाड़ी चलाने के अपराध में केस तो जुवेनाइल कोर्ट में चलेगा, लेकिन बच्चे के अभिभावकों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना या तीन साल की सजा दी जा सकती है। इस मामले में एक साल तक के लिए वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है और नाबालिग को 25 साल तक का होने तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं जारी किये जाने का प्रावधान है।