बीकानेर के स्थानीय तहसीलदार ने इलाके में जमीन आवंटन में कथित फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। इसके बाद राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज कुछ प्राथमिकी और आरोपपत्रों का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी ने 2015 में हुए सौदे के संबंध में एक आपराधिक मामला दर्ज किया था।
दूसरी ओर वाड्रा के वकील सुमन ज्योति खेतान ने ईडी की छापेमारी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल से जुडें करीबी सहयोगियों के तीन स्थानों पर ईडी की टीम ने छापेमारी की है।
उन्होंने हमारे लोगों को स्काइलाईट हॉस्पिटेलिटी के अंदर बंद कर दिया और वे किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं दे रहे हैं। क्या यह नाजीवाद है, क्या यह जेल है। उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल के दौरान कुछ भी नहीं मिला है और अब वह हमें बंद करके फर्जी साक्ष्य तैयार कर रहे हैं। इस कार्यवाही के दौरान वाड्रा के घर ईडी के अधिकारियों के पहुंचने की सूचना ने भी हवा पकड़ी, लेकिन निदेशालय द्वारा इसकी पुष्टी नहीं की गई।
याद रहे कि पिछले साल दिसंबर में ईडी ने नागर के करीबी सहयोगी अशोक कुमार तथा एक अन्य व्यक्ति जयप्रकाश भार्गव को गिरफ्तार किया था। बताया जाता है कि नागर का स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ाव है और इस कंपनी के तार वाड्रा से जुड़े हुए हैं।
माना जा रहा है कि ईडी इस इलाके में जमीन खरीदने वाली कंपनी-स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड के संचालन के बारे में वाड्रा से पूछताछ करना चाहती है। दरअसल यह कंपनी कथित तौर पर उनसे जुड़ी है।
ईडी वाड्रा का सामना उन लोगों से भी कराना चाहती है जिन्होंने इसे उनसे जुड़ा बताया है। गौरतलब है कि इस एजेंसी मामले में एक बड़ी स्टील कंपनी की भूमिका की भी जांच कर रही है। संदेह है कि स्टील कंपनी ने उस कंपनी को कर्ज दिया जिसने बहुत महंगी कीमत पर वाड्रा से जुड़ी कंपनियों से जमीनें खरीदी। एजेंसी ने पूर्व में वाड्रा से जुड़े महेश नागर और कुछ अन्य के परिसरों पर छापा मारा था।