इस बात की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि सुषेण मोहन गुप्ता को जमानत मिल जाती है तो वह भी माल्या व नीरव समेत 36 आरोपियों की तरह देश छोड़कर भाग जाएगा। यह दलील प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वीवीआईपी चौपर डील मामले में आरोपी गुप्ता की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सोमवार को दी। एजेंसी ने कहा सुषेन मोहन गुप्ता ने साक्ष्यों को नष्ट करने की भरसक कोशिश की थी लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो सका। मामले में आरोपी से सरकारी गवाह बने राजीव सक्सेना के बयान के आधार पर गुप्ता को एजेंसी ने गिरफ्तार किया था।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने सुषेन मोहन गुप्ता की जमानत याचिका पर बचाव पक्ष व अभियोजन की दलीलें सुनने के बाद फैसला 20 अप्रैल तक सुरक्षित रख लिया।
कोर्ट के समक्ष जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी के विशेष वकील डीपी सिंह व नवीन कुमार माटा ने कहा कि अब तक विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी तथा संदेसरा बंधुओं समेत 36 आरोपी जिनके खिलाफ मुकदमे लंबित हैं देश छोड़कर भाग चुके हैं।
ईडी के वकीलों ने यह भी कहा कि राजीव सक्सेना को सरकारी गवाह बनने की अनुमति मिलने के बाद गुप्ता उसे प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। वह ईडी के संभावित सरकारी गवाह को रोकने के लिए दुबई गया था और केस में डायरी की चर्चा आने के बाद गुप्ता ने उसे फोन करना शुरु कर दिया था।
ईडी ने गुप्ता का रिमांड मांगते हुए पहले कहा था कि राजीव सक्सेना से पेन ड्राइव में दो डायरी मिली थी जिनका संबंध कथित रूप से गुप्ता से है। कोर्ट के समक्ष जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी ने कहा कि गुप्ता ने 2016 के अपने बयान में कहा था कि उसे मॉरीशस स्थित इंटरस्टेलर टैक्रोलोजी की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन उसका यह बयान पूरी तरह गलत है। इस कंपनी का इस्तेमाल घूस की रकम को ट्रांसफर करने में किया गया था। मामले में जांच में सामने आया था कि यह सारा पैसा गुप्ता के निर्देश पर ट्रांसफर किया जा रहा था।
दूसरी ओर गुप्ता की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता सिद्घार्थ अग्रवाल व पीवी कपूर ने कहा कि गुप्ता को जब भी समन जारी किया गया वह हमेशा जांच में शामिल हुआ। वह आगे भी जांच में सहयोग करता रहेगा।
ईडी ने गुप्ता को 26 मार्च को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। कोर्ट ने एजेंसी की पूछताछ के बाद गुप्ता को आठ अप्रैल को 20 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।