जांच एजेंसी ने दावा किया कि 27 जून को मामले के जांच अधिकारी (आईओ) एलएनजेपी अस्पताल गए जहां उन्होंने पाया कि जैन मरीज के बिस्तर पर बिना किसी परेशानी के सो रहे थे और यहां तक कि मल्टीपारा रोगी मॉनिटर भी बंद किया गया था। किसी भी चिकित्सा उपकरण से उनकी निगरानी नहीं की जा रही थी और उनकी पत्नी कमरे में मौजूद थीं। जब आईओ कमरे में पहुंचे तो प्रतिवादी ने तुरंत ऑक्सीजन मास्क पहना, बीपी उपकरण बेल्ट, और मॉनिटर चालू किया। तथ्य यह है कि प्रथम दृष्टया प्रतिवादी की स्थिति ऐसी नहीं है कि उसे अस्पताल में भर्ती किया जा सके।
ईडी ने इस मुद्दे को लेकर निचली अदालत के समक्ष भी आवेदन दायर किया था लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय ने निचली अदालत के 6 जुलाई के आदेश को चुनौती दी है। जांच एजेंसी ने कहा कि जैन दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री का प्रभार संभाल रहे थे, एलएनजेपी अस्पताल की वेबसाइट के होम पेज पर प्रमुखता से दिखाए जा रहे हैं। साथ ही अस्पताल में पट्टिका पर उनके द्वारा अतिथि के रूप में उद्घाटन की याद में दिखाया गया है। इडी ने कहा जैन की अंतरिम जमानत पर सुनवाई के दौरान उन्होंने यह मुद्दा उठाया लेकिन अदालत ने उनके आग्रह को खारिज कर एलएनजेपी अस्पताल से जवाब मांगते हुए सुनवाई 29 जुलाई तय की है।
प्रवर्तन निदेशालय को इस बात पर गंभीर संदेह है कि क्या लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल या जीबी पंत अस्पताल में जैन की सही चिकित्सा स्थिति मिलेगी क्योंकि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते अधिकारी प्रभाव में है। ईडी की याचिका में कहा गया है कि जैन की या तो एम्स, आरएमएल या सफदरजंग अस्पताल में जांच की जाए।