फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 : पूरे देश से तीन गुना ज्यादा कमाते हैं दिल्लीवाले

Tue, 20 Mar 2018 12:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
क्राइम - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

देशवासियों की तुलना में दिल्लीवाले तीन गुना ज्यादा अमीर हैं। दिल्ली की औसत आमदनी राष्ट्रीय स्तर से तीन गुना ज्यादा है। ताजा आर्थिक सर्वे में दिल्ली में हर व्यक्ति की कमाई मौजूदा कीमतों पर 3,29,093 रुपये पर पहुंचने का अंदाजा है। वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2017-18 विधानसभा के पटल पर रखा।

विज्ञापन


आर्थिक सर्वे का आकलन वर्तमान और स्थिर दोनों मूल्यों पर किया गया है। इसके मुताबिक, पिछले साल प्रति व्यक्ति आय 3,00,793 रुपये थी। मौजूदा वित्त वर्ष में इसके 3,29,093 रुपये पहुंचने का अंदाजा है।  राष्ट्रीय स्तर की तुलना में दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय तीन गुना ज्यादा है। इसका सीधा असर लोगों की रिहाइश पर पड़ा है।

दूसरी तरफ दिल्ली के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) व नेट स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (एनएसडीपी) में भी क्रमश: 11.22 प्रतिशत व 11.51 फीसदी बढ़ोतरी का अंदाजा है। वर्तमान मूल्यों पर मौजूदा वित्त वर्ष में 6,86,017 करोड़ रुपये जीएसडीपी के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। वहीं, एनएसडीपी वर्तमान मूल्यों पर 6,26,002 करोड़ रुपये रहेगा।
विज्ञापन


राजस्व प्राप्तियों पर ब्याज भुगतान के अनुपात में भी कमी आई है। यह स्वस्थ आर्थिक स्थित का सूचक है। इससे साफ है कि ऋणों पर राज्य सरकार का सही नियंत्रण है। यह 2007-08 के 16.79 फीसदी से घटकर 2016-17 में 8.39 फीसदी रह गया।

2016-17 (अनंतिम) के दौरान कर राजस्व की वार्षिक वृद्धि दर 3.03 प्रतिशत हुई, जबकि 2015-16 में यह 13.61 प्रतिशत थी। कर वसूली लक्ष्य इस साल 19.33 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य सरकार ने रखा है। राजस्व अधिशेष की स्थिति निरंतर बना हुआ है।

शिक्षा को सरकार ने दी प्राथमिकता

manish sisodia - फोटो : अमर उजाला
2017-18 में कुल आवंटित बजट का 19.1 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा के क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया। इसके बाद सामाजिक सुरक्षा और कल्याण पर 16.7 प्रतिशत, परिवहन 16.5 प्रतिशत, चिकित्सा और जन-स्वास्थ्य पर 14.2 प्रतिशत, आवास और शहरी विकास पर 12.8 प्रतिशत, जलापूर्ति और स्वच्छता पर 9.5 प्रतिशत आवंटित किया गया। 

दक्षिणी दिल्ली में यह सबसे अधिक है। पूर्वी दिल्ली में सबसे कम।

वन्य व हरित क्षेत्र में इजाफा
दिल्ली के वन व वृक्षाच्छादित क्षेत्र में इजाफा दर्ज किया गया।  हालांकि, शहरीकरण के कारण फसल क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है। दिल्ली में कुल वन और वृक्षाच्छादित क्षेत्र 2017 में बढ़कर 305.41 वर्ग किलोमीटर हो गया है।

हरित क्षेत्र भी बढ़कर 20.6 प्रतिशत हो गया है।  दक्षिण दिल्ली जिले में वन आच्छादित क्षेत्र सबसे ज्यादा 83.35 वर्ग किलोमीटर है। पूर्वी दिल्ली जिले में वन आच्छादित क्षेत्र सबसे कम 3.70 वर्ग किलोमीटर है। वन विभाग ने अन्य एजेंसियों के साथ मिल कर 2016-17 के दौरान कुल 8.72 लाख पौधे व 12.31 लाख झाड़िया लगाईं।

दिसंबर 2017 तक 5.5 लाख पौधे और 7.93 लाख झाड़ियां लगाई गई। शहरीकरण के कारण फसल क्षेत्र में कमी आई है। सकल फसल क्षेत्र 2000-01 के दौरान 52816 हेक्टेयर था, जो 2017-18 में घट कर 34750 हेक्टेयर रह गया। शहरीकरण और विशेषकर पिछले दो दशकों में व्यावसायिक पैटर्न में बदलाव के कारण ऐसा हो रहा है।
विज्ञापन

आर्थिक सर्वेक्षण की अन्य बातें 

इंडिया गेट - फोटो : अमर उजाला
  • 2011 की जनगणना के अनुसार 97.50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में रहती थी। 2001 में ग्रामीण क्षेत्र 558.32 वर्ग किलोमीटर था, जो 2011 में घट कर 369.35 वर्ग किलोमीटर रह गया। दिल्ली में गांवों की संख्या 2001 में 165 थी, जो 2011 में घटकर 112 रह गई है।
  • दिल्ली में आबादी का घनत्व 2001 में 9340 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था, जो 2011 में बढ़ कर 11320 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो गया।
  • दिल्ली में नागरिक पंजीकरण प्रणाली के तहत पंजीकृत जन्म के अनुसार लिंग अनुपात 2001 में प्रति 1000 के लड़कों के पीछे 809 लड़कियां थीं, जो 2016 में बढ़कर 902 हो गया है।
  • दिल्ली की जनसंख्या मार्च 2011 में 167.88 लाख थी। 2001-2011 की अवधि में दिल्ली की दशकीय आबादी में बढ़ोतरी 21.2 प्रतिशत हुई।
  • दिल्ली में विद्युत आपूर्ति 2010-11 के दौरान 32744 मिलियन यूनिट थी, जो 2016-17 में बढ़ कर 34011 मिलियन यूनिट हो गई।
  • बिजली उपभोक्ताओं की कुल संख्या 2016-17 में 55.68 लाख थी। पिछले 10 वर्षों में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या दिल्ली में 94.11 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
  • व्यस्तता समय में बिजली की मांग 2010-11 में 4720 मेगावाट थी जो 2016-17 में बढ़ कर 6261 मेगावाट हो गई।
  • बिजली की खपत में करीब 3.51 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई है।
  • चालू फैक्ट्रियों की संख्या 2012 में 8557 थी, जो 2016 में बढ़ कर 8968 हो गईं है।
  • दिल्ली में 83 फ्लाईओवर और आरयूबी/आरओबी के निर्माण कार्य पूरा किया गया है।
  • दिल्ली जल बोर्डे के पास वितरण के लिए 913 एमजीडी पानी उपलब्ध है। यमुना से 375 एमजीडी, गंगा से 240 एमजीडी, भाखड़ा स्टोरेज से 218 एमजीडी और 80 एमजीडी ट्यूबवेल व भूमिगत स्रोतों से उपलब्ध हैं। मल जल उपचार क्षमता 607 एमजीडी हैै।
  • दिल्ली जल बोर्ड द्वारा प्रदान किए गए जल कनेक्शनों की कुल संख्या 2009-10 की 17.85 लाख से बढ़ कर 2016-17 में 24.95 लाख हो गई।
  • द्वारका, सुलतानपुरी और सवादा घेवरा में आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों के लिए 10684 फ्लैटों का निर्माण किया गया । भलस्वा में 7400 ईडब्ल्यूएस फ्लैट व पूठ खुर्द, बापरौला, बवाना, नरेला, घोगा और भोरगढ़ में 16600 ईडब्ल्यएस मकान निर्माणाधीन हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें