थॉमसन रॉयटर्स की वाइस प्रेसीडेंट श्रुति जायसवाल का कहना था कि बाजार का नियम है कि पहले कोई क्रांतिकारी तकनीक वजूद में आती है, उसके बाद ही उसके हिसाब से प्रतिभाशाली कर्मचारियों की खोज आरंभ होती है। तकनीकी अनुसंधान की गति इतनी तेज है कि हर महीने कोई न कोई क्रांतिकारी तकनीक आ जाती है। इसलिए अपस्किलिंग या राइट स्किल ट्रेनिंग की बजाय समाज को एडवांस स्किलिंग यानी अग्रिम तौर पर सुयोग्य मैनपॉवर तैयार रखनी होगी। तभी हम रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स या आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसी बेरोजगारी पैदा करने वाली तकनीकों का मुकाबला कर पाएंगे।
वीकेंड इन्वेस्टिंग कंपनी के संस्थापक आलोक जैन का कहना था कि गरीबी कायम रहने की एक वजह यह है कि देश में आज भी लोगों को बचत से सही जुड़े तौर तरीकों की जानकारी नहीं है। ज्यादातर लोग सोना और रियल एस्टेट में बचत लगाकर फंसा देते हैं जबकि जरुरत इसकी है कि बचत को रोजगार पैदा करने वाले कारखाने-उद्योगों में निवेश किया जाए।
परिचर्चा के अंत में प्रोफेसर सीमा शर्मा ने आर्थिक असमानता, जलसंकट, वायुप्रदूषण जैसे मुद्दों को संयुक्त रुप देते हुए देश के करोड़ों लोगों से अपील की कि ब्रांड या शॉपिंग मॉल्स की बजाय छोटे दुकानदार या वेंडर से सामान लेने को पहली पसंद बनाएं। ताकि असमानता की टीस को दूर करने में कुछ फीसदी मदद हो सके। अंत में आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने परिचर्चा में मौजूद विशेषज्ञों से सवाल भी किए। जेके पेपर्स के सीएफओ वी कुमारस्वामी ने परिचर्चा का संचालन किया।
कमजोर नेत्ररोगियों को सस्ता विकल्प
देश के वर्तमान आर्थिक हालात पर करीब एक घंटे चली परिचर्चा के दौरान क्लियरदेखो डॉट कॉम के सौरभ दयाल ने बताया कि आर्थिक असमानताओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों तक बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती है। गरीबी के कारण लाखों रोगी अपने लिए चश्मा तक नहीं बनवा पाते। इसीलिए उन्होंने एक स्टॉर्ट अप शुरू किया है, जो 500 रुपये में लैंस सहित चश्मा उपलब्ध कराता है। उन्होंने ये भी कहा कि जल्द ही उनकी पहुंच ग्रामीण भारत तक होगी।
टैक्स प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान है
मुंबई सेंटर फॉर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन की सेक्रेटरी जनरल व रजिस्ट्रार नीति सचदेवा ने परिचर्चा के दौरान कहा कि आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए टैक्स नीति प्रबंधन पर जोर दिया जाना चाहिए लेकिन सच है कि आज लोग टैक्स बचत प्रबंधन पर ज्यादा जोर देते हैं जिसमें उन्हें वकीलों और चार्टर्ड एकाउंटेंटों की मदद मिलती है। टैक्स बचत के लिए ही कई कंपनियां सामाजिक भलाई वाले सीएसआर कार्यक्रम चला रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों देश के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर इन पर जोर दिया जाए तो काफी हद तक आर्थिक असमानता से लड़ा जा सकता है।