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अरावली में टूट रहा वन्य जीवों का सुरक्षा का कवच, 3 वर्ष में 10 तेंदुए की मौत

Sun, 26 Nov 2017 09:58 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
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तेंदुआ
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जिस अरावली को वन्य जीवों की सुरक्षा का कवच माना जाता रहा है। अब वहीं तेंदुओं के रक्त से लहूलुहान होती जा रही है। तीन साल में यहां 10 तेंदुओं की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद मनोहर सरकार और उसके वन मंत्री इस मामले को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं।
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इन मौतों से वन्य जीव विभाग की कार्यप्रणाली और नीयत पर सवाल खड़ा होने लगा है। शुक्रवार को अरावली में मृत मिले तेंदुआ के बाद अरावली में जंगली जानवरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पिछले साल भी 24 नवंबर को सोहना के गांव मंडावर में लोगों ने तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला था। इस वर्ष 06 अक्तूबर को मानेसर के मारुति प्लांट में भी तेंदुआ घुस गया था। जिस बहुत मुश्किल 36 घंटे के अभियान के बाद निकाला जा सका था। 
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गुरुग्राम और फरीदाबाद के क्षेत्रों में अरावली का वन्य क्षेत्र फैला हुआ है। जंगली जानवरों का घर अरावली से सटे क्षेत्रों में अवैध कब्जा होता जा रहा है। पूरी अरावली में जगह-जगह निर्माण गतिविधियों से अरावली का परिस्थैतिकी तंत्र बिगड़ रहा है।

परिस्थैतिकी तंत्र बिगडने का असर तेंदुए की जीवन पर पडने लगा है। तेंदुआ आबादी में घुस रहा है। अब अकाल की मौत मरने लगे हैं। वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि इनकी सुरक्षा की बात तो दूर इनके मौत के रहस्यों का खुलासा तक करने में विभाग लगातार अक्षम रहा है।

हर घटना के बाद विभाग के अधिकारियों का रटा रटाया जवाब होता है कि सुरक्षा का इंतजाम करेंगे। लेकिन उसके बाद एक कदम भी आगे नहीं बढ़ते। सेव अरावली से जुड़े पर्यावरणविद् जितेंद्र भड़ाना कहते हैं कि मंडावर के आसपास नेताओं ने अपने फार्महाउस बनाकर जंगल को तहस-नहस कर दिया है।

भोजन से अधिक प्यास बुझाने के लिए तेंदुए या अन्य वन्य जीव रिहायशी इलाकों में भागते हैं। जिसकी वजह से यह इन इलाकों में दिखने लगे हैं। जंगल में न पीने के पानी का इंतजाम और न ही शिकारियों से सुरक्षा का। 

पीपल फॉर एनिमल हरियाणा के चेयरमैन नरेश कादयान का कहना है कि इको-बैलेंस गड़बड़ हो गया है। प्रशासनिक लापरवाही के कारण फूड चैन (खाद्य श्रृंखला) बर्बाद हो गया है। प्राकृतिक फूड चैन में नील गाय और हिरण जरूरी था, लेकिन यह अब खत्म हो चुका है।

अरावली में निर्माण की वजह से छोटे जंगली जानवर खत्म हो गए हैं। इसकी वजह से तेंदुआ या तो आबादी के बीच आ रहा है या भूखे प्यासे मौत हो रही है। जंगलों में आदमी की दखल अंदाजी से जंगली जानवरों को खतरा हो गया है। लोगों को जंगली जानवरों से कोई खतरा नहीं है। लोगों ने ही जंगलों पर कब्जा कर लिया हैए इसलिए वे बेचारे कहां जाएं।
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तेंदुओं पर संकट
-24 नवंबर 2017 : खडग़ सोहना गांव में मृत मिला तेंदुआ
-24 नवंबर 2016: गांव मंडावर में लोगों ने पीट-पीटकर तेंदुआ को मार डाला। 
-मई 2016: सोहना क्षेत्र के गैरतपुर बांस के जंगलों में मृत मिला तेंदुआ। 
-जनवरी 2016: गैरतपुर बास से सटे जंगलों में पेड़ से बंधा मिला था शावक। बाद में इलाज के दौरान आगरा में मौत हो गई। 
-मई 2015: गुडग़ांव-फरीदाबाद पर एक तेंदुए की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई थी। 
-नवंबर 2014: मानेसर के सहरावन गांव के पास सड़क दुर्घटना में 12 वर्षीय तेंदुए की मौत हो गई थी। 
-अप्रैल 2014: चार तेंदुओं की मौत मानेसर गोल्फ कोर्स परिसर के आसपास संदिग्ध अवस्था में हुई थी। 

कब-कब दिखाई दिया तेंदुआ
-06 अक्तूबर 2017: मानेसर के मारुति प्लांट में तेंदुआ घुसा, 36 घंटे सर्च ऑपरेशन के बाद पकड़ा गया। फिर छोड़ा अरावली में
-02 मई 2017: सोहना के दमदमा क्षेत्र में दिखा था तेंदुआ
-18 अप्रैल 2017: डीएलएफ गोल्फ कोर्स में तेंदुआ दिखे जाने की सूचना, रात भर वन विभाग ने चलाया था सर्च अभियान, लगाया कैमरा
-29 मार्च 2017: मांगर में दिखा तेंदुआ, वहां मिले पग मार्क
-01 मार्च 2017: गांव हरचंदपुर में दो शावक के साथ दिखा तेंदुआ
-08 दिसंबर 2016: सोहना कस्बे के मंडावर गांव में तेंदुआ दिखा। वन्य जीव विभाग की टीम वहां पहुंची, जब तक तेंदुआ जंगलों में जा चुका था
-05 दिसंबर 2016: गांव हरचंदपुर में तेंदुआ के साथ दो शावक दिखा। जिसके बाद लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। जिसके बहाद तेंदुआ वापस चला गया
-24 नवंबर 2016: गांव मंडावर में करीब ढाई वर्ष का तेंदुआ गांव में घुस गया। जिसके बाद भयभीत लोगों ने पीट-पीटकर तेंदुआ को मार डाला। 
-मई 2016: सोहना क्षेत्र के गैरतपुर बांस के जंगलों में मृत मिला तेंदुआ। 
-जनवरी 2016: गैरतपुर बास से सटे जंगलों में पेड़ से बंधा मिला था शावक। बाद में इलाज के दौरान आगरा में मौत हो गई। 
-06 अगस्त, 2015: मानेसर के पास अरावली में तेंदुआ दिखने से मचा था हड़कंप। 
-08 मई 2015: मांगर के पास सड़क पर तेंदुआ दिखा। 
-13 जनवरी 2015: सोहना के दमदमा इलाके में दिखा था तेंदुआ और शावक।
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