विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर कुतुब मीनार अब कुछ कमजोर हुई है। भूकंप और आंधी से कुतुब मीनार को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।
इस बात का खुलासा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से कराए गए शोध से हुआ है। जबकि अब सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की ने इस पर स्टडी शुरू की है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कुतुब मीनार की मजबूती को बनाए रखने के लिए पहले छोटे स्तर पर इसकी मरम्मत भी कराई है।
दो बार गिर चुकी है बिजली
तकरीबन 72.5 मीटर की ऊंचाई वाली इस मीनार में 379 सीढ़ियां है। उसके आसपास भी मरम्मत कराए जाने की योजना है।
एएसआई के पुरातत्वविदों ने यह भी आशंका जताई है कि भूकंप और आंधी तूफान से कुतुब मीनार को नुकसान पहुंच सकता है। इससे पहले वर्ष 1326 और वर्ष 1368 में बिजली गिरने से इसे दो बार नुकसान पहुंचा था।
इतिहास के मुताबिक, बादशाह कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसकी बुनियाद रखी थी। हालांकि एक मान्यता यह भी है कि दिल्ली के अंतिम चौहान राजा पृथ्वीराज चौहान ने कुतुब मीनार का निर्माण किया था। ताकि उनकी उनकी पुत्री अपने दैनिक पूजा अर्चना के रूप में इसकी चोटी से पवित्र यमुना नदी का दर्शन कर सके।
दोबारा बनवाई गई थी छतरी
कुतुब मीनार की पूरी वास्तुकला इस्लामी मूल के होने का संकेत देती है। हालांकि हिंदू शिल्पियों को निश्चित रूप से इसके निर्माण में लगाया गया था। जैसा कि उसकी सतह पर अंकित कुछ देव नागरी लेखों से स्पष्ट है।
शुरू में इस पर एक छतरी भी थी, जो भूकंप के दौरान गिर गई। अंग्रेज मेजर स्मिथ ने बाद की मुगल शैली में इसके स्थान पर दूसरी छतरी उन्नीसवीं शताब्दी के शुरू में बनवाई।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निदेशक हाजी डॉ. सैय्यद जमाल हसन कहा कि कुतुब मीनार की मजबूती बनाए रखने के लिए समय-समय पर मरम्मत की जा रही है। उन्होंने फिलहाल कुतुब मीनार के झुकने की बात से इंकार किया है।