30वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले का भ्रमण करते हुए विदेश
मंत्री सुषमा स्वराज ने अगले वर्ष मिस्र को सहयोगी देश बनने का निमंत्रण
दिया। साथ ही थीम स्टेट तेलंगाना के जन्म में अहम भूमिका निभाने की बात
कहते हुए कहा कि आज यहां उन्हें सुखद संगम मिला है। क्योंकि उनका जन्म
हरियाणा में हुआ है।
मुख्य चौपाल पर विदेश
मंत्री के सम्मान में देश-विदेश के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की
प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि के रूप में स्वराज ने कहा कि तेलंगाना के लोग
उन्हें चिन्नमा कहकर बुलाते हैं। उन्होंने कहा कि वे हरियाणा की बेटी हैं
और तेलंगाना की मौसी।
इस तरह थीम स्टेट तेलंगाना से उनका खास नाता बन गया
है। इन दोनों राज्यों के बीच भी अनूठी समानता है। उन्होंने रूस के कलाकारों
द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रोम के साथ
भारतीयों का खून का संबंध हैं।
रूस से निकले देशों में भारतीय संस्कृति के
प्रति विशेष भाव और प्रेम हैं। मिस्र के महोत्सव में बॉलीवुड कलाकार अमिताभ
बच्चन को ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था। और जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
रूस गए तो वहां सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने वाली
महिलाएं रूस की ही थीं। जिन्होंने भरतनाट्यम व वंदेमातरम की प्रस्तुति से
उनका अभिनंदन किया। जब वे रूस गईं तो उनकी माथे की बिंदिया देखकर रूसी लोग
हर्षित हो उठे।
सुषमा स्वराज शनिवार को
सूरजकुंड मेला पहुंची और मेले का भ्रमण कर मुख्य चौपाल पर देश-विदेश से आए
कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। उनकी अगवानी प्रदेश के
शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने की। विदेशमंत्री ने कई स्टॉलों पर जाकर
शिल्पकारों से उनकी कला के बारे में भी जानकारी ली।
हरियाणा
के अपना घर में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अधिकारी ने उन्हें पगड़ी
बांधी। इस दौरान मिस्र के राजदूत हातिम ताकिलदान ने विदेश मंत्री का स्वागत
करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंधों की प्रगाढ़ता में यह मेला अहम
भूमिका निभाएगा। इस मौके पर मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा, विधायक मूलचंद
शर्मा, हरियाणा लोक सेवा आयोग की सदस्य वंदना शर्मा तथा सतीश गुप्ता को
स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।
जादू, नृत्य और प्रतिस्पर्धाओं का संगम बनी छोटी चौपालजादुई कलाएं, तेलंगाना के मनमोहक नृत्य और पर्यटकों के लिए
प्रतिस्पर्धाएं। अंतरराष्ट्रीय मेले में इन सबका संगम छोटी चौपाल पर देखने
को मिल रहा है। यहां स्वस्थ मनोरंजन के साथ दर्शकों को सरकार की जनहितकारी
योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है।
शनिवार
को छोटी चौपाल पर तेलंगाना का रंग छाया रहा। तेलंगाना के कलाकारों ने
बोनालू नृत्य की मधुर प्रस्तुति से आगाज किया। वहीं ताशा और गूगा कलाकारों
ने अपने साथी कलाकारों के साथ मिलकर बोनालू की जानदार प्रस्तुति दी।
तेलंगाना के समा और रूनम ने अपने साथियों के साथ हर खुशी के अवसर पर किये
जाने वाले कोलाटम नृत्य की भी शानदार प्रस्तुति दी।
कलाकारों ने बताया कि
कोमा महोत्सव के दौरान इस मशहूर लोक नृत्य की प्रस्तुति विशेष तौर पर दी
जाती है। इस दौरान जादूगर अशोक ने छोटी चौपाल पर अद्भुत जादुई कलाओं से
दर्शकों को अचंभित किया। छोटी चौपाल पर दर्शक युवतियों और महिलाओं के लिए
म्यूजिकल चेयर प्रतिस्पर्धा का आयोजन भी किया गया। खादी ग्रामोद्योग के
तत्वावधान में आयोजित म्यूजिकल चेयर प्रतिस्पर्धा में कल्पना जैन विजेता
बनीं, वहीं उपविजेता का खिताब अर्चना पांडेय को मिला। विजेताओं को एंकर जय भगवान कंबोज तथा शशि वर्मा ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
सूरजकुंड पर छाया वेलेंटाइन डे का नशासूरजकुंड मेला परिसर सिर्फ शिल्पकारों और कलाकारों की ही खास जगह नहीं है
बल्कि यह युवाओं का भी पहुंचने का केंद्र बन गया है। यहां पर प्रेमी जोड़ों
के लिए भी बहुत कुछ खास है।
मेला युवा
जोड़ों के लिए डांस फ्लोर की तरह है। जहां कम से कम आधा दर्जन जगहों पर वह
देसी धुन पर नाचने-गाने का आनंद ले सकते हैं। खाने-पीने का लुत्फ उठा सकते
हैं। यहां वेलेंटाइन डे के दिन युवाओं की सबसे ज्यादा भीड़ होने की संभावना
है। इसी को देखते हुए मेला प्रशासन ने टिकट काउंटर बढ़ाने का निर्णय लिया
है।
कई शिल्पकारों ने जहां खरीदारी पर छूट की घोषणा की है, वहीं कई फूलो के
खुले स्टॉल सजे हुए हैं। इन स्टॉलों पर शनिवार से ही खरीदारी शुरू हो गई
है। रेवाड़ी से आए शिल्पकार सतीश शर्मा ने बताया कि उनके यहां वेलेंटाइन डे
पर 10 रुपये से लेकर 150 रुपये तक के गुलाब स्टिक उपलब्ध हैं। स्टॉल नंबर
586 के नेशनल अवार्डी शिल्पकार झाबरमल ने वेलेंटाइन डे पर लाख की चूडिय़ों
पर 20 फीसदी तक छूट देेने की घोषणा की है।
स्टॉल
नंबर 740 की भूपिंदर कौर ने बताया कि युवाओं के लिए कम कीमत के स्टिक
गुलाब बनाकर तैयार किए गए हैं। फ्लॉवर स्टाल से शनिवार से ही लोगों ने
खरीदारी शुरू कर दी है। जूट ज्वैलरी की स्टेट अवार्डी दिव्यारानी सिंह ने
बताया कि उन्होंने आज के लिए स्पेशल जूट ज्वैलरी बना रख्री है। जिनकी कीमत
महज 20 रुपये से लेकर 250 रुपये तक है।
यहां
आकर युवा जोड़े प्रेम से जुड़े असम के बीहू एवं त्रिपुरा के संगराई नृत्य
का मजा ले सकते हैं। रंगाली बीहू नृत्य के दौरान युवक अपनी पसंद वाली
युवतियों को प्रपोज करते हैं। मेला परिसर में खड़े बांस के पेड़ों पर भी
प्रेम झलकता है।
उत्तरांखड की छात्राओं ने मचाया धमालमेले
की मुख्य चौपाल पर अल्मोड़ा (उत्तराखंड) से संस्कार सांस्कृतिक कला मंच के
बैनर तले आई कॉलेज की छात्राओं ने घसियारी लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों
को मंत्रमुग्ध कर दिया। टीम लीडर प्रकाश विष्ठ ने बताया कि टीम में
शामिल नेहा सिजवाली, योगिता आर्य, नीतू कर्नाटक, सोनिया चौहान, ज्योति
थापा, प्रियंका राजन कॉलेज गोइंग छात्राएं हैं, जो पढ़ाई के साथ इस कला में
रुचि रखती हैं। उन्होंने बताया कि घसियारी नृत्य घर का काम काज निपटाने के
बाद जब उत्तराखंड की महिलाएं पशुओं के लिए चारा लेने जाती हैं और थकने के
बाद मनोरंजन के लिए नृत्य करती हैं।
बोनालू नृत्य करतीं तेलंगाना की कलाकार।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्टॉल पर पहुंचकर शिल्पकारों से उनकी कला के बारे में भी जानकारी ली।