एडीएम सिटी रक्षपाल सिंह के प्रयासों से लोकसभा चुनावों में अफसरों की सिरदर्दी कम हो गई। एक घंटे हुई बातचीत के बाद नरेश गौतम को मनाने में अफसर कामयाब रहे और वह अपनी पत्नी का टिकट वापस लेने पर मान गए।
इससे बाद प्रशासन को केवल 2225 ईवीएम ही लगानी होंगी। यदि वह नाम वापसी पर राज नहीं होते तो दो गुनी ईवीएम लगानी पड़ती।
ईवीएम में वोटिंग के 16 कालम होते हैं। इस बार प्रत्येक ईवीएम में 16 वां कालम नोटा का रहेगा। ऐसे में एक ईवीएम पर मात्र 15 प्रत्याशियों के लिए मतदान किया जा सकता है।
जिले में प्रत्याशियों का गणित गड़बड़ाया हुआ था। कुल 38 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था, जिनमें से 22 के आवेदन निरस्त हो गए थे।
ऐसे में 16 प्रत्याशी मैदान में रह गए थे। इनमें से नरेश गौतम और उनकी पत्नी सविता गौतम भी आमने-सामने चुनाव लड़ रहे थे।
अफसरों का प्रयास था कि यदि एक प्रत्याशी नाम वापस ले ले तो प्रत्येक बूथ पर एक ईवीएम से ही मतदान हो जाएगा। जबकि 16 प्रत्याशियों के लिए प्रत्येक बूथ पर दो-दो ईवीएम लगानी पड़ती।
इनके लिए दो गुने स्टाफ, स्थान और संसाधनों की जरूरत पड़ती। ऐसे में प्रशासन एक प्रत्याशी को नाम वापस लेने के लिए तैयार कर रहा था।
मंगलवार को एडीएम सिटी और प्रत्याशी नरेश गौतम के मध्य एक घंटे की बातचीत हुई। इसमें नरेश गौतम चुनाव खर्च और परेशानी कम कराने की अपील पर अपनी पत्नी का टिकट वापस लेने पर मान गए।
हालांकि सविता गौतम ने बाबा साहब के सविधान प्रदत्त अधिकारों का हवाला देकर चुनाव लड़ने की जिद की, लेकिन समझाने के बाद वह मान गईं।