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Dwarka fire : ऐसा लगा सदमा कि सूख गए आंसू, जुबान भी खामोश; सबकुछ हो गया खत्म...खुशियां हो गईं स्वाहा

Wed, 11 Jun 2025 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली

सार

आग जिस इमारत में लगी उसके पास फायर एनओसी भी नहीं थी। यह लापरवाही भी कहीं न कहीं अग्निशमन विभाग की है कि राजधानी दिल्ली की अधिकतर ऊंची इमारतों में अग्नि सुरक्षा के उपाय ही नहीं हैं।
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सदमा और बेबसी... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पति, बेटी और भतीजे को अग्निकांड में गंवाने वाली ममता यादव के आंसू सूख गए हैं और जुबान खामोश। ममता ने तीनों को आग में घिरा देखकर उन्हें चीखते हुए घर के बाहर भागने के लिए भी कहा लेकिन बढ़ती आग के बीच तीनों बालकनी की ओर भागे। इधर ममता बेटे और अन्य परिजनों के साथ छत की ओर। ईश्वर से मना रही थी कि तीनों सकुशल हों लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।    

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शबद सोसाइटी में यश यादव का मकान नौवीं(पार्किंग को गिनकर दसवीं मंजिल) मंजिल पर है। जेठ के यहां हुई भागवत से ममता अपने पति बच्चों और परिजनों के साथ हंसी-खुशी घर आई। एक बजे सभी फ्लैट में पहुंचे और कुछ देर हंसी-खुशी के बाद सोने का इंतजाम करने लगे। यश, बेटी और भतीजा तीनों हॉल में ही सो गए। इधर कुछ देर बाद ममता अपने बेटे आदित्य और अन्य परिजनों के साथ गेट के पास वाले कमरे में सोने चली गई। सुबह सांस लेने में तकलीफ हुई तो नींद खुली तो देखा कमरे में धुआं-धुआं भरा है। चीखते हुए सभी को बाहर भागने को कहा। 

मकान नौंवी मंजिल पर था, इस कारण ममता यादव, आदित्य और उसकी चाची ने वहां लेट कर अपनी जान बचा ली। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तीनों की हालत ठीक हैं और खतरे से पूरी तरह बाहर है।
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सबकुछ हो गया खत्म...खुशियां हो गईं स्वाहा  
यश के भतीजे योगेश ने बताया कि 2023 के मई महीने में तीन करोड़ 50 लाख में चार कमरों का पैंटहाउस खरीदा गया था। अशोक विहार में चाचा की दो फैक्टरी हैं। पूरा परिवार बहुत खुश था लेकिन आज सब खत्म हो गया। उनके चाचा और छोटे-छोटे बच्चे अब इस दुनिया में नहीं रहे। अब आगे क्या होगा, नहीं पता। पैंटहाउस जलने के साथ उसमे बसने वाली खुशियां भी स्वाहा हो गईं। सोसाइटी के रख-रखाव का सिस्टम अब भी मेंटेनेंस चार्ज में ही बंद है। इन लोगों के पास आग बुझाने तक के इंतजाम होना चाहिए था। आपातकालीन निकासी भी काम नहीं कर सकी।

सभी सो रहे थे तभी आग का नहीं चला पता
नई दिल्ली। द्वारका सेक्टर 13 स्थित फ्लैट के हॉल से आग की शुरूआत हुई। यश के भतीजे योगेश ने बताया कि उस समय घर पर मौजूद रहे परिजनों ने से पूछा तो उन्होंने बताया कि चाचा, आसीमा और शिवम बालकनी के पास वाले कमरे में सोए थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य दूसरे कमरे में सोए थे। घटना के समय सभी सो रहे थे। अचानक हॉल में धुआं फैलने से नींद खुली। ये लोग कुछ समझ पाते तब तक आग ने विकराल रूप ले लिया। अगर नींद में नहीं होते तो शायद हादसा होता ही नहीं। 

काश घर पर भी रुक जाते सभी 
योगेश ने बताया, वह अपने परिवार के साथ मोहन गार्डन इलाके में रहता है। 4 जून से उसके घर पर भागवत कथा हो रहा थी, जिसमें परिवार के सभी लोग शामिल थे। वह सुबह जाते थे और रात को वापस आते थे। सोमवार को भंडारा होने से उनके चाचा का परिवार देर रात करीब एक बजे अपने घर पहुंचा था। उन्हें कई लोगों ने घर पर भी रुकने के लिए कहा लेकिन चाचा ने कहां यहां काफी लोग हैं तो कुछ लोग वहां चले चलेंगे तो आराम से सो सकेंगे। काश पूरा परिवार यहीं रुक जाता तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। 

इमारत के पास फायर एनओसी  तक नहीं
आग जिस इमारत में लगी उसके पास फायर एनओसी भी नहीं थी। यह लापरवाही भी कहीं न कहीं अग्निशमन विभाग की है कि राजधानी दिल्ली की अधिकतर ऊंची इमारतों में अग्नि सुरक्षा के उपाय ही नहीं हैं। फायर एनओसी नहीं होने पर जब अग्निशमन विभाग के  अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऊंची इमारतों में अग्नि सुरक्षा की जांच और वहां के उपकरणों की जांच करने के लिए निरीक्षण करने पर विचार किया जा रहा है। बीते अप्रैल में दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी इमारतों, अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का फायर ऑडिट कराया था लेकिन इस साल ये ऑडिट नहीं हुआ है। 

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