कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में चिकित्सा जगत पहली पंक्ति में खड़ा है। खुद और परिवार की परवाह किए बगैर स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात मरीजों की सेवा कर रहे हैं। इनकी बदौलत ही मरीज लगातार स्वस्थ हो रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं एम्स के ट्रॉमा सेंटर में तैनात नर्सिंग अधिकारी रमेश, जो संक्रमण की शुरुआत से अभी तक कोविड वार्ड में सेवा दे रहे हैं। अब तक करीब 700 मरीज उनके सामने ठीक होकर घर जा चुके हैं।
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रहने वाले रमेश (38) चार अप्रैल से लगातार कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं। जून में एक हादसे में उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया था। करीब एक माह बिस्तर पर रहने के बाद वह लाठी का सहारा लेकर ड्यूटी करने पहुंच गए थे। डॉक्टरों और मरीजों ने रमेश के इस हौसले की सराहना की। 15 सितंबर को वह कोरोना संक्रमित हो गए और 15 दिन होम आइसोलेशन में रहे। संक्रमण को मात देने के बाद वह फिर से मरीजों के इलाज में जुट गए। पिछले सप्ताह उन्होंने प्लाज्मा दान कर एक गंभीर मरीज की जान भी बचाई।
पापा घर कब आओगे...
रमेश बताते हैं कि वह सात माह से अपने घर नहीं गए। शुरुआत के चार माह तक उन्होंने घरवालों को यह भी नहीं बताया था कि वह कोविड वार्ड में काम कर रहे हैं। वह घरवालों से सिर्फ फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से ही बात करते हैं। बच्चों की तरफ से सवाल आते हैं...‘पापा अपना ख्याल रखना। पापा घर कब आओगे’? लेकिन रमेश इसका जवाब नहीं दे पाते हैं।
35 बार कर चुके रक्तदान
रमेश ने बताया कि वह 20 साल की उम्र से रक्तदान कर रहे हैं और अब तक करीब 35 बार रक्तदान कर चुके हैं। कोरोना काल में भी तीन बार रक्तदान किया। अस्पताल से ठीक होकर गए मरीजों को भी वह प्लाज्मा दान करने के लिए प्रेरित करते हैं।
भाई भी ट्रॉमा सेंटर में तैनात
रमेश के बड़े भाई अशोक भी कोविड वार्ड में हैं। वह भी शुरू से ही यहां तैनात हैं। अशोक ने बताया कि वह 14 साल से एम्स में सेवा दे रहे हैं, लेकिन इस महामारी जैसा दौर उन्होंने कभी नहीं देखा।
डॉक्टर भी करते हैं तारीफ
एम्स के डॉक्टर विजय गुर्जर ने बताया कि वह कई वर्षों से रमेश को जानते हैं। मार्च के आखिरी सप्ताह में जब एम्स के ट्रॉमा सेंटर में कोविड वार्ड बनाया गया था तो उस दौरान उन्होंने यहां काम करने की इच्छा जताई थी। वह चाहते तो पैर में फ्रैक्चर के बाद अपनी ड्यूटी बदलवा भी सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।