दिल्ली में जेन जी आंदोलन के बाद लगातार सियासी झंझवातों का सामना कर रही भाजपा को पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजे ने सियासी टॉनिक दिया है। सकारात्मक नतीजे के बाद पार्टी का उत्साह बढ़ा है और वह इन परिणामों को पीएम मोदी पर युवाओं के भरोसे की जीत और युवाओं में भरोसा बहाली के लिए चलाए गए अभियानों की सफलता के रूप में देख रही है। ये नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब चंद महीने बाद पार्टी को उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का सामना करना है।
जेन जी आंदोलन के बाद दतिया व बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी सकते में थी। हालात संभालने के लिए पार्टी और सरकार के स्तर पर युवाओं का खोया भरोसा लौटाने के लिए कई तरह के अभियान की शुरुआत की गई थी। इनमें बड़े पैमाने पर रोजगार की घोषणा, स्कूल-कॉलेजों में संपर्क अभियान, जेन जी में लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेेटफॉर्म पर संवाद व प्रचार का तरीका अपनाया गया था।
जेन जी आंदोलन के बाद भी कांग्रेस का खाली हाथ
पार्टी पंजाब विवि और डूसू दोनों जगह कांग्रेस के खाली हाथ रहने को भी बेहद अहम मान रही है। रणनीतिकारों का कहना है कि जेन जी आंदोलन के बाद कांग्रेस ही पूरे देश में युवाओं के भाजपा के खिलाफ होने की धारणा बना रही थी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देश भर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर रहे थे।दो अहम चुनावों में कांग्रेस के खाली हाथ रहने से भाजपा यह धारणा बनाने में सफल रहेगी कि मुख्य विपक्षी पार्टी के साथ युवा वर्ग नहीं है।
चुनाव था लिटमस टेस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि डूसू चुनाव जेन जी में विश्वास बहाली संबंधी पार्टी के अभियान के लिए लिटमस टेस्ट था। अगर विद्यार्थी परिषद चुनाव हारती तो यह धारणा मजबूत होती कि भाजपा से युवा वर्ग दूर जा रहा है। चूंकि डीयू में देशभर के छात्र पढ़ते हैं, ऐसे में चुनाव के नतीजे को जेन जी के संदर्भ में पूरे देश की मानसिकता से जोड़ कर देखा जा सकता है। उक्त नेता ने कहा पंजाब विवि छात्र संघ चुनाव में जीत ने पार्टी में भरोसा पैदा किया, डूसू की जीत से पार्टी में जेन जी की नाराजगी को दूर कर लेने का विश्वास पैदा हुआ है।