दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव में करीब एक लाख पैंतीस हजार छात्रों में से 44.46 प्रतिशत छात्रों ने मतदान किया।
छात्र संघ चुनावों में ABVP की शानदार जीत पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी नीतियों और धारणाओं को आगे बढ़ाने और जनसेवा करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं | जहां तक डूसू चुनाव का सवाल है हमें दिल्ली के युवाओं के चयन पर पूर्ण विश्वास है कि उन्होंने सही और योग्य उम्मीदवार का चुनाव किया है और ABVP उन सभी युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरी उतरेगी |
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कभी भी भेदभाव की राजनीति नहीं करती बल्कि सबका साथ सबका विकास की तर्क पर काम करती है और यही कारण रहा कि हमने छात्र संघ चुनावों में भी जीत हासिल की है।
मनोज तिवारी ने कहा कि भाजपा ने युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए समर इंटर्नशिप, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी कई नीतियां भी तैयार की है जो कि आने वाले समय में युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए काम आएंगी । क्योंकि अगर युवाओं का विकास होगा तो देश का विकास होगा।
मनोज तिवारी ने कहा कि आज देश में विकास की लहर दौड़ रही है और आगामी चुनावों में भी भाजपा सरकार पीएम मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनाएगी।
बता दें कि, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (डूसू) में मतगणना प्रक्रिया के दौरान ईवीएम में आ रही बार-बार खराबी के चलते फिर सवाल उठाए गए हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। पार्टी के प्रदेश संयोजक गोपाल राय का कहना है कि जब चुनाव आयोग छात्रसंघ का चुनाव ईवीएम से नहीं करवा पा रही है तो देश में इससे निष्पक्ष चुनाव करवाना कैसे संभव है। राय का आरोप है कि एबीवीपी को जीत दिलाने के लिए ऐसी साजिश रची गई है।
दरअसल, गुरुवार को डूसू चुनाव की मतगणना के दौरान दो बार ईवीएम मशीन में खराबी आई। दिलचस्प यह कि सचिव पद के लिए आठ उम्मीदवार व एक नोटा को मिलाकर ईवीएम पर नौ बटन होने चाहिए थे। लेकिन मतगणना के दौरान एक ईवीएम पर न सिर्फ 10 बटन थीं, बल्कि उसके खाते में चालीस वोट भी पड़े थे। इसे लेकर छात्र संगठनों ने हंगामा भी किया।
इस पर गोपाल राय ने मीडिया के सामने कहा कि चुनाव आयोग पूरे देश को भरोसा दिला रही है कि ईवीएम सुरक्षित है। इससे पूरे देश में एक साथ निष्पक्ष चुनाव कराना संभव हो सकेगा। लेकिन डूसू चुनाव में जिस तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं वह हैरान करने वाली हैं। डूसू चुनाव से यह साबित हो रहा है कि भाजपा संसदीय चुनाव से पहले कोई दूसरा चुनाव हारना नहीं चाहती।