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DUSU चुनाव परिणामः जेएनयू के बाद DU में फीका पड़ा भगवा रंग, दो सीटों पर NSUI का कब्जा

Wed, 13 Sep 2017 03:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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dusu election - फोटो : अमर उजाला
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डूसू चुनाव में बडे उलटफेर के साथ एनएसयूआई ने दो पदों पर कब्जा जमा लिया है। चार साल के लंबे इंतजार के बाद एनएसयूआई ने वापसी की और रॉकी तुषीड अब डूसू के अध्यक्ष बन गए हैं। वहीं सच‌िव पद पर एबीवीपी का कब्जा हुआ है। बता दें क‌ि अभी अध‌िकार‌िक घोषणा नहीं हुई है।
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यह जीत एनएसयूआई और कांग्रेस दोनों के लिए ‌ही प्रेरणादायी है। हालांकि यह चार साल से डूसू में काबिज एबीवीपी के लिए बहुत बड़ा झटका है। #DUSUelection2017: NSUI wins President Post, ABVP wins Secretary post — ANI (@ANI) September 13, 2017

बताते चलें क‌ि मंगलवार को हाईकोर्ट ने चुनाव परिणाम पर लगाई गई रोक को हटाते हुए नतीजे घोषित करने की मंजूरी प्रदान कर दी। न्यायमूर्ति इंद्रमीत कौर ने 8 सितंबर को दिए अपने अंतरिम निर्णय में संशोधन करते हुए यह मंजूरी दी है।

दरअसल, डीयू प्रशासन ने आवेदन दायर कर तर्क रखा कि मात्र अध्यक्ष पद के परिणाम को रोकना संभव नहीं है क्योंकि मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों द्वारा किया जा रहा है।
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अदालत ने साफ कर दिया कि अध्यक्ष पद का चुनाव परिणाम भले ही घोषित कर दिया जाए लेकिन एनएसयूआई के प्रत्याशी रॉकी तुषीड की याचिका पर आने वाले फैसले पर ही परिणाम निर्भर रहेगा।
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अनुशासनात्मक कार्रवाई के आधार पर रद्द कर दिया गया था

डूसू चुनाव - फोटो : अमर उजाला
डीयू प्रशासन ने हाल ही में रॉकी तुषीड का नामांकन वर्ष 2014 में उसके खिलाफ की गई कथित अनुशासनात्मक कार्रवाई के आधार पर रद्द कर दिया गया था। तुषीड उस समय शिवाजी कॉलेज का छात्र था। उसने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने रॉकी को अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की इजाजत प्रदान की और डीयू प्रशासन को परिणाम सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया था। तुषीड की याचिका पर सुनवाई 28 सितंबर तय है।

सुनवाई के दौरान रॉकी तुषीड के ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने कहा था कि उनके मुवक्किल को शिवाजी कॉलेज ने वार्निंग दी थी, लेकिन अनुशासनहीनता की कोई कार्रवाई नही की गई।

कॉलेज ने न तो उसे रेस्टीकेट किया, न कोई कड़ी कार्रवाई की गई थी। उसी कॉलेज के प्रिंसिपल ने बाद में उनके मुवक्किल को गुड करैक्टर का सर्टिफिकेट दिया। उन्होंने कहा रॉकी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है। उन्होंने कहा नामांकन खारिज करने से पूर्व कमेटी ने उनके मुवक्किल का पक्ष तक नहीं सुना। यह एक पक्षीय निर्णय है।
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