उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि विकसित भारत 2047 की कुंजी आपके पास है, इसे अनलॉक करें। डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए शताब्दी समारोह एक लांच पैड है। यह आपको नई मंजिलों और ऊंचाइयों तक ले जाएगा। वह डीयू के 100वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने छात्रों को आजीवन सीखते रहने की सलाह दी। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने नौ विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और पुरस्कारों से सम्मानित किया।
समारोह के दौरान 2022-23 में अपनी डिग्री पूरी करने वाले यूजी, पीजी के 1,38,020 विद्यार्थियों को डिजिटली, जबकि पीएचडी के 659 विद्यार्थियों को समारोह में डिग्री प्रदान की गई। उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डीयू के शताब्दी दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति के रूप में आकर बेहद खुशी महसूस हो रही है। डिग्री का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस बार प्रदान की जाने वाली डिग्री में कई नए फीचर हैं। धनखड़ ने विद्यार्थियों को सुझाव देते हुए कहा कि डिग्री प्राप्त करने के साथ ही आपका सीखना खत्म नहीं होता बल्कि सीखते रहना एक आजीवन प्रक्रिया है।
उन्होंने छात्रों से कहा कि आप सभी भारत 2047 की मैराथन यात्रा में एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसकी सफलता आपके कंधों पर हैं। समारोह की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का स्वागत किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति को राम मंदिर का मॉडल व राम लला की मूर्ति का प्रतिरूप दिया गया। इस अवसर पर चार पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। समारोह में दक्षिणी परिसर के निदेशक प्रो. श्री प्रकाश सिंह, एसओएल की निदेशक प्रो. पायल मागो और रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता सहित डीन, विभागाध्यक्ष, समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
659 को मिली पीएचडी की डिग्री
डीयू के 100 वें दीक्षांत समारोह में 659 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई। इनके अलावा 1,38,020 स्नातक विद्यार्थियों को भी डिग्रियां प्रदान की गई जिनमें 1,30,697 यूजी और 7,323 पीजी विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें 58,545 पुरुष और 79,475 महिला विद्यार्थी हैं। ये डिग्रियां डिजिटल मोड में प्रदान की गई जबकि मेडल और पुरस्कार मंच से प्रदान किए गए। इस बार डीयू के दीक्षांत समारोह में कुल 207 मेडल-पुरस्कार प्रदान किए गए इनमें 173 गोल्ड मेडल एवं सर्टिफिकेट थे और 34 पुरस्कार सर्टिफिकेट थे। इन मेडल-पुरस्कारों को प्राप्त करने वाले कुल विद्यार्थियों की संख्या 167 रही, जिनमें 110 महिला और 57 पुरुष विद्यार्थी शामिल हैं।
डिग्री में कई नए फीचर
डिग्री का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि इस बार प्रदान की जाने वाली डिग्री में कई नए फीचर हैं। इनमें सबसे प्रभावशाली है विद्यार्थी की मां का नाम और विद्यार्थी की रंगीन तस्वीर। इस डिग्री पर करेंसी नोटों की तरह 17 अद्वितीय सुरक्षा फीचर हैं, जिससे उसकी नकल करना मुश्किल होगा।
भाई-भतीजावाद और पक्षपात के दिन गए
उप राष्ट्रपति ने कहा कि कानून को लागू करने की क्षमता और जवाबदेही अब नया मानदंड है। संरक्षण, भाई-भतीजावाद और पक्षपात के दिन अब गए। जो भारत आपका इंतजार कर रहा है वह सबको समान अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भारत एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है। दुनिया अब भारत की नरम कूटनीति को एक स्थिर शक्ति के रूप में पहचानती है।
विद्यार्थियों को प्रदान किए मेडल
उपराष्ट्रपति ने मंच से 9 विद्यार्थियों को मेडल और पुरस्कार प्रदान किए। इनमें मिरांडा हाउस की खुशी कुमार को डॉ शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल, राजकुमारी अमृत कौर कॉलेज ऑफ नर्सिंग की जिशा श्रीवास्तव को एमएससी नर्सिंग के लिए द प्रेसीडेंट्स गोल्ड मेडल, होली फैमिली कॉलेज ऑफ नर्सिंग की अंजलि शर्मा को बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग के लिए द प्रेसीडेंट्स सिल्वर मेडल, कॉमर्स स्ट्रीम में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के आदित्य यादव को वाइस चांसलर गोल्ड मेडल (दिव्यांग), साइंस स्ट्रीम में शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज की दिव्यांग छात्रा प्रेस्ठा हुड्डा को वाइस चांसलर गोल्ड मेडल, सेंट स्टीफन कॉलेज से मोनिका को डॉ. सीडी देशमुख मेमोरियल गोल्ड मेडल सहित 5 मेडल, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की अन्नेशा चक्रबोरती को आर. विश्वनाथन मेडल-2021 सहित 5 मेडल, मिरांडा हाउस की मीनाक्षी को प्रो. राम बिहारी मेडल सहित कुल चार मेडल और हिंदू कॉलेज से मोहम्मद अक्यूब खान को प्रो. आरपी मित्रा गोल्ड मेडल सहित चार मेडल प्रदान किए गए।