डॉक्टरों की लापरवाही से चार साल की प्रियांशी जीवनभर चलने-फिरने से भी मोहताज हो गई है। बच्ची का ऑपरेशन किया जाना था, लेकिन डॉक्टरों ने केवल प्लास्टर लगाया और दवा देकर छोड़ दिया। अदालत ने इस मामले में दो डॉक्टरों व अन्य लोगों पर एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश थाना जीटीबी एंक्लेव पुलिस को दिया है। मामला शाहदरा स्थित जीटीबी अस्पताल का है।
कड़कड़डूमा अदालत की महानगर दंडाधिकारी स्निग्धा सरवरिया ने गंगा विहार निवासी सुरेंद्र कुमार की शिकायत पर डॉक्टर राहुल अंशुमन व डॉक्टर नरेश कुमार सैनी व अन्य लोगों पर उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 3 जुलाई को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। पीड़ित सुरेंद्र ने अधिवक्ता प्रवीण गोस्वामी के जरिये अदालत में अर्जी दायर की थी। सुरेंद्र ने अर्जी में बताया कि उसकी चार वर्षीय बेटी प्रियांशी वर्मा 30 नवंबर 2017 को सीढ़ियों से गिर गई थी, जिससे उसके कूल्हे वाले हिस्से पर चोट लग गई थी।
जीटीबी अस्पताल में अस्थि रोग विभाग में मौजूद डॉक्टर राहुल अंशुमन ने उसका इलाज किया। बच्ची का एक्स-रे देखने के बाद डॉक्टर ने दायें पैर में मामूली फ्रेक्चर बताया और अपने सहयोगियों से प्लास्टर कराकर दवा दे दी। डॉक्टर के कहे अनुसार माता-पिता बच्ची को 7 दिसंबर 2017 को ओपीडी में दिखाने गए। वहां पर डॉक्टर नरेश कुमार सैनी ने एक्स-रे जांच किए बगैर ही दो सप्ताह दवा खिलाने और दो सप्ताह बाद आने के लिए कहा। 21 दिसंबर 2017 डॉक्टर नरेश सैनी नेबच्ची का प्लास्टर काट दिया गया और कहा कि वह 20 दिन में चलने लगेगी, लेकिन इसके बाद बच्ची की हालत बिगड़ने लगी।
प्रियांशी को दूसरे डॉक्टर को दिखाया गया, जहां पता चला कि बच्ची का कूल्हा अपनी जगह से हट गया था और उसका ऑपरेशन किया जाना था। इसकी शिकायत जीटीबी के चिकित्सा अधीक्षक से करनी चाही तो पीड़ित को मिलने नहीं दिया गया, जिस पर पीड़ित ने दिल्ली सरकार के हेल्पलाइन नंबर 1031 पर शिकायत की। इसके बाद पीड़ित को अस्पताल बुलाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसकी न सुनकर अपने सहकर्मियों का पक्ष लिया। बच्ची को पहले एम्स में भर्ती कराया गया और उसके बाद 6 फरवरी 2018 को उसका ऑपरेशन सेंट स्टीफन अस्पताल में किया गया। ऑपरेशन करने वाले व अन्य डॉक्टरों के मुताबिक, अब बच्ची कभी नहीं चल पाएगी।