कोरोना महामारी के चलते बेशक शिक्षण संस्थान बंद थे पर शिक्षकों ने दिन-रात मेहनत करके छात्रों को पढ़ाई से जोड़े रखा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरकारी से लेकर निजी स्कूलों के शिक्षकों ने छात्रों की सहूलियत के आधार पर घर बैठे पढ़ाई से जोड़ा और डिजिटल गैप को भरा। इसी मुहिम और नवाचारों का फायदा अब ऑफलाइन मोड में आने के बाद दिख रहा है।
दरअसल, ज्यादातर बच्चों में पढ़ने को लेकर दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि, दो साल घर में रहने से छात्रों में अनुशासनहीनता, मात्रा में गलती से लेकर लर्निंग गैप दिख रहा है। इसमें सुधार के लिए ब्रिज कोर्स से लेकर मिशन बुनियाद अभियान अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। वहीं, शिक्षकों को ऐसे हालात से निपटने और छात्रों से संयमित व्यवहार, तनाव न लेने और गुस्सा न करने आदि को लेकर स्प्रिचुअल ट्रेनिंग दी जा रही है।
छात्रों की सहूलियत के आधार पर कराई पढ़ाई
दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय की शिक्षिका, मेंटर और राष्ट्रीय अवार्डी मनु गुलाटी कहती हैं कि दिल्ली सरकार के स्कूलों के शिक्षकों ने शिक्षा निदेशालय की गाइडलाइंस में ऑनलाइन क्लासरूम का प्लान तैयार किया था, जिससे छात्र-छात्राएं अब भी पढ़ाई में दिलचस्पी ले रहे हैं। बेशक, लर्निंग गैप है पर उसे धीरे-धीरे दूर कर लिया जाएगा। दो साल जब विद्यार्थी पूरी तरह से स्कूल से दूर होगा तो यह दिक्कतें सामान्य हैं। जब महामारी शुरू हुई तो सरकारी स्कूलों के ऐसे कई छात्रों के पास मोबाइल नहीं था या फिर घर में सिर्फ एक सदस्य के पास मोबाइल था। वह सदस्य घर का मुखिया था और सुबह से शाम तक काम के सिलसिले में बाहर रहता था। ऐसे छात्रों की दिक्कतों को देखते हुए दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने सहूलियत के आधार पर ऑनलाइन क्लास लेने का फैसला लिया।
सभी शिक्षक मिल-जुलकर और एक-दूसरे से बात करके समस्याओं का समाधान भी तकनीक से निकाल रहे थे। उदाहरण के तौर पर ऐसे छात्रों के लिए यदि रात 10 बजे घर में मोबाइल उपलब्ध होता था तो तब शिक्षक उसकी सहूलियत के आधार पर तभी क्लास लेता था। इसके अलावा व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अभिभावकों को जोड़ा और उन्हें स्ट्डी मैटेरियल उपलब्ध कराया जाता था। पढ़ाई के साथ शिक्षकों ने बच्चे के मानसिक तनाव को दूर करने की भी ऑनलाइन काउंसलिंग की है। वहीं, घर तक किताबें पहुंचाई गईं। यूटयूब सेशन के अलावा वीडियो बनाकर पढ़ने में मदद कराई गई। इसी का परिणाम है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों में आज भी पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी है। लर्निंग गेप समेत अन्य दिक्कतों के समाधान के लिए मिशन बुनियाद शुरू हो रहा है। इसके लिए शिक्षकों को बड़े स्तर पर प्रशिक्षित किया जा रहा है।
अनुशासनहीनता समेत लर्निंग गैप दूर करना बड़ी चुनौती
दिल्ली स्थित वसुंधरा एंक्लेव स्थित एवरग्रीन पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल प्रियंका गुलाटी कहती हैं कि छात्रों की अनुशासनहीनता, लर्निंग गैप को दूर करना सबसे बड़ी चुनौती है। दो साल घर में रहने के कारण छात्र-छात्राएं स्कूल और क्लासरूम में उठना, बैठना, बात करना, पढ़ना आदि सब भूल चुके हैं। ऐसे में शिक्षकों को इन कमियों को दूर करना बड़ी चुनौती है। इसलिए शिक्षकों के तनाव और इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्हें आठ हफ्ते की विशेष स्प्रिचुअल ट्रेनिंग कराई जा रही है। इसका मकसद है कि वे धैर्य, संयम, सहनशीलता के साथ छात्रों को दोबारा अनुशासन से जोड़ें। उन्हें संयमित रहकर, बिना छात्र पर गुस्सा किए हर बात के लिए समझाना होगा। छात्र को बहुत ज्यादा बांधकर नहीं रखा जाएगा, बल्कि धीरे-धीरे उन्हें सामान्य क्लासरूम में लाना है। इसके लिए शिक्षकों को बड़ी चुनौती के साथ बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। इसमें वे तनाव में न आए, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। मात्रा में गलती, पढ़ना नहीं आ रहा, परीक्षा की आदत नहीं रही आदि दिक्कतों के समाधान के लिए ब्रिज कोर्स शुरू किए जाएंगे। एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र 2022-23 शुरू होने के बाद एक नए तरह का क्लासरूम दिखेगा।