एम्स के पल्मेनरी विशेषज्ञ डॉ. करण मदान ने बताया कि आईसीएमआर की रिपोर्ट के बाद अस्थमा की स्थिति साफ हो चुकी है। हर दिन मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि धूल भरी आंधी में प्रदूषण के कण शामिल होते हैं। अक्सर लोग आंधी को लेकर ज्यादा सतर्क नहीं रहते। जिसकी वजह से भारी मात्रा में प्रदूषित कण उनके शरीर में प्रवेश करते हैं।
ये सीधेतौर पर इंसान को सांस संबंधी परेशानी देना शुरू कर देते हैं। हालांकि डॉ. मदान का कहना है कि इनहेलर की वजह से अस्थमा मरीजों को काफी आराम आया है। लेकिन मरीजों की संख्या बढने के मामले में भारत पूरी दुनिया में चीन के बाद दूसरे नंबर पर पहुंच चुका है।
मैक्स अस्पताल के डॉ. विवेका कुमार का कहना है कि जो मरीज अस्थमा ग्रस्त हैं या जो स्वस्थ्य हैं। सभी को इस वक्त घर से निकलने से पहले अपने चेहरे को बारीक कॉटन कपड़े से ढ़ंक लेना चाहिए।
ताकि छोटे छोटे प्रदूषित कण सांस के जरिए प्रवेश न कर सकें। घर वापस आने के बाद गुनगुने पानी से गला साफ करें। साथ ही इस मौसम में ठंडे पानी का स्नान जरूर करें। ताकि शरीर के छिद्रों में मौजूद प्रदूषित कण निकल सकें। इससे त्वचा संबंधी बीमारी होने की आशंका भी कम होगी।
क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार यूपी के बाद पश्चिम बंगाल (34.85), महाराष्ट्र (33.90), बिहार (28.82), राजस्थान (23.90), मध्य प्रदेश (20.82) और पंजाब में 7.73 लाख मरीज अस्थमा ग्रस्त हो चुके हैं।
जबकि पूरे देश में अस्थमा की वजह से मरीजों की मौत राजस्थान में ज्यादा हो रही हैं। वहां इसकी मृत्युदर प्रति लाख की आबादी पर 23 पहुंच चुकी है।