दिल्ली विश्वविद्यालय में 90 फीसदी क्षेत्रीय आरक्षण लागू करने के विरोध में छात्रों ने सोमवार से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के आरक्षण जल्द लागू करने के आदेश को तुगलकी फरमान बताया।
उनका कहना था कि दिल्ली सरकार द्वारा फंडिंग किए जाने वाले कॉलेजों में क्षेत्रीय आरक्षण लागू करने से राज्यों में नफरत फैलेगी। यह कदम देश के कोने-कोने से आने वाली प्रतिभाओं पर कुठाराघात होगा।
यह भी पढ़ें: DU स्टूडेंट्स को यह सुनहरा मौका आज तक
सूरज झा, पवन द्विवेदी और पवन कुमार ने कहा कि केजरीवाल राज ठाकरे की तरह राज्य को तरजीह न दें, बल्कि देश हित के बारे में सोचें।
उन्होंने कहा कि सरकार आरक्षण के फैसले को वापस ले, ताकि देश के होनहारों को दिल्ली में पढ़ाई से वंचित न होना पड़े।
भगत सिंह क्रांति सेना के बैनर तले अनशन पर बैठे दल के अध्यक्ष तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कहा कि अगर छात्रों की संख्या के लिहाज से सीटें कम हैं तो मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का दायित्व बनता है कि वे सीटों की संख्या बढ़ाएं या सभी कॉलेजों में शाम की शिफ्ट में पढ़ाई की व्यवस्था करवाएं।
छात्रों का आरोप है कि ऐसा करने के बजाय नफरत की राजनीति करना पूरी तरह गलत है।