दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव का बिगुल बज चुका है। डूसू चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जाता है। कुछ समय में चार राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन से जुड़ी पार्टी भी मैदान में कूद चुकी हैं। उनकी नजर डूसू चुनाव के रास्ते विधानसभा चुनाव में धमक बनाने की है।
वहीं दिल्ली विधानसभा के संभावित चुनाव को भी बड़े नेताओं ने टारगेट के रूप में रखा है। लिहाजा भाजपा, कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच छात्रसंघ चुनाव में फाइट दिखने की संभावना है। डूसू चुनाव में अहम मुकाबला एबीवीपी और एनएसयूआई में ही होता आया है।
दोनों ही संगठनों के प्रत्याशियों में जाट-गुर्जर फैक्टर देखने को मिलता है। इस बार हरियाणा विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रत्याशियों के चयन में यह फैक्टर ज्यादा देखने को मिल सकता है। चाहे वह एनएसयूआई हो या एबीवीपी, चारों सीटों पर काबिज होने के लिए पूरा दमखम लगाने को तैयार हैं।
आगामी दिनों में दोनों ही संगठनों की पार्टियों से जुड़े बड़े पदाधिकारियों के चुनावी समर में सामने आने की संभावना है। कुछ दिनों में दिल्ली में भी विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में दोनों ही संगठन कोई चूक नहीं करना चाहते हैं। केंद्र में भाजपा की सरकार होने से एबीवीपी कार्यकर्ता उत्साह से लबरेज हैं। वहीं एनएसयूआई सोमवार को आए बिहार उपचुनाव के आए नतीजों से डूसू और विधानसभा चुनाव में जीत को लेकर चल रही है।