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डीटीयू विशेषज्ञों ने शोध में किया दावा, यातायात वाहनों से नैनो कणों का प्रसार होता है अधिक

Tue, 27 Oct 2020 12:53 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वाहनों से उत्पन्न प्रदूषण - फोटो : amar ujala
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यातायात वाहनों से नैनो कणों का प्रसार अधिक होता है। यह खुलासा दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) के लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में चार चरणों में किए गए शोध में हुआ है। दरअसल लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण कम होने की खबरें के चलते विशेषज्ञों ने दिल्ली प्रदूषण पर शोध किया है। यह शोध 24 मार्च से 31 मई 2020 के बीच चार चरणों में चला था। इसमें विशेषज्ञों की टीम ने सड़क किनारे प्रदूषण पर फोकस किया था। 

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कुलपति प्रो. योगेश सिंह के मुताबिक, इस शोध में साबित हुआ है कि प्रदूषण फैलाने वाले और  सेहत पर सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाले नैनो कणों के उत्सर्जन में वाहनों का सबसे अधिक योगदान है। विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार मिश्रा ने अपनी टीम के साथ लॉकडाउन के दूसरे चरण से लेकर अंतिम चरण (चौथे चरण) तक अध्ययन किया।

इस अध्ययन के दौरान यूएफपी यानि अल्ट्राफाइन पार्टिकुलेट मैटर (100 नैनोमीटर से कम व्यास के कण) और यूएफपी से अधिक को लेकर वायु गुणवत्ता पर लॉकडाउन के प्रभाव का निरीक्षण किया गया। क्योंकि पहले और दूसरे चरण में आपातकालीन स्थिति को छोड़कर, व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ व्यक्तिगत गतिविधियों पर भी सख्त प्रतिबंध था। लॉकटाउन के तीसरे और चौथे चरण में इन प्रतिबंधों पर छूट दी गई थी ताकि शहरों और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को फिर से शुरू किया जा सके।
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डॉ. राजीव कुमार मिश्रा के अनुसार इस अध्ययन में 10 नैनोमीटर व्यास से लेकर 1 माइक्रोमीटर व्यास के आकार वाले कणों के प्रसार की 24 घंटे की निगरानी के आधार पर इनका विश्लेषण किया गया। क्योंकि 100 नैनोमीटर व्यास से कम व्यास वाले कणों (यूएफपीद्ध की मानव अंगों में प्रवेश क्षमता अधिक होने,उच्च सतह क्षेत्र और कण संख्या के कारण इनका मानव स्वास्थ्य पर पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे बड़े कणों की अपेक्षा अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है।

छोटे कणों (100 नैनोमीटर व्यास से कम) के संदर्भ में यह निष्कर्ष निकला है कि वाहनों के उत्सर्जन के साथ-साथ प्राकृतिक उत्सर्जन का भी कम प्रदूषित (यानी लॉकडाउन का दूसरा चरण) शहरी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान है। हालांकि अत्यधिक प्रदूषित (यानी लॉकडाउन का चौथा चरण) शहरी क्षेत्रों में आमतौर पर ऐसी स्थितियां नहीं देखी जाती हैं। लॉकडाउन के अंतिम चरण में शहरी क्षेत्र में संचय मोड अधिक नजां आया और 30 नैनोमीटर से 100 एनएम व्यास वाले कणों के उत्सर्जन और संचय मोड में यातायात वाहनों द्वारा उत्सर्जन को महत्वपूर्ण स्रोतों के रूप में पाया गया।

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