दिल्ली सरकार को बसों में विज्ञापन की आमदनी में झटका लगा सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सार्वजनिक परिवहन में तीन तरफ विज्ञापन पर आपत्ति दर्ज कराई है। तर्क है कि ड्राइवर साइड बसों में लगे विज्ञापन से दूसरी तरफ के वाहन चालक का ध्यान भटकता है। इससे दुर्घटना की आशंका बनती है। ऐसे में तीन तरफ की विज्ञापन नहीं लगाए जाने चाहिए।
दिल्ली परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) बोर्ड ने बसों में विज्ञापन की नई नीति को पिछले दिनों ही मंजूरी दी थी। उस बैठक में ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी भी मौजूद थे। नई नीति के बाद से क्लस्टर बसों में विज्ञापनदाता बढ़े हैं।
अब ट्रैफिक पुलिस की आपत्ति से विज्ञापन रुक सकते हैं। विज्ञापन एक साइड से हटाने का फैसला आने पर आमदनी को झटका लग सकता है जिसकी वजह से सरकार और पुलिस के बीच खींचतान बढने की आशंका भी है।
सूत्रों के अनुसार बसों के दायीं तरफ विज्ञापन को लेकर ट्रैफिक पुलिस ने पत्र भेजकर कहा है कि इससे चालक का ध्यान भटकता है। हादसे की आशंका बनती है। पुरानी नीति में बायीं तरफ और पिछले हिस्से में विज्ञापन लगाए जाने की छूट थी।
इस बीच दिल्ली सरकार ने एसटीए बोर्ड में नए सदस्य भी बना दिए हैं। कस्तूरबा नगर के विधायक मदन लाल और नजफगढ़ के विधायक कैलाश गहलोत नए सदस्य बनाए गए हैं।
सूत्र बताते हैं कि ट्रैफिक पुलिस की आपत्ति को जल्द ही एसटीए बोर्ड में रखा जाएगा। विज्ञापन पुरानी नीति के हिसाब से बायीं तरफ और पिछले हिस्से तक सीमित करेंगे या फिर नई नीति जारी रहेगी, ये बोर्ड की आगामी बैठक में तय होगा।