दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स ड्रग गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 10 करोड़ का ड्रग्स पकड़ा है। टीम ने अफ्रीकी मूल की महिला समेत गिरोह के दो सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान नवादा निवासी यास्मीन टूरे और लाइबेरिया निवासी हनोक तर्र उर्फ पीटर (33) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से 8.070 किग्रा मेथमफेटामाइन ड्रग बरामद की है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। ड्रग कार्टेल के शेष सदस्यों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मनोज सी ने बताया, 26 अप्रैल को धौला कुआं मेट्रो स्टेशन के पास मेथमफेटामाइन की खेप के साथ एक नाइजीरियाई महिला की आवाजाही के बारे में एक सूचना प्राप्त हुई। इसके बाद एक टीम बनाई और उस स्थान के पास जाल बिछाया गया। लगभग 8.30 बजे आरोपी यास्मीन टूरे से ट्रॉली बैग से तीन प्लास्टिक पॉलिथीन में छुपाकर रखी गई कुल 6.010 किलोग्राम मेथमफेटामाइन बरामद की गई। गिरफ्तार आरोपी ने खुलासा किया कि वह दिल्ली में अफ्रीकी मूल के व्यक्तियों की तरफ से चलाए जा रहे ड्रग कार्टेल की सदस्य थी। उसने यह भी खुलासा किया कि उसने तिलक नगर में रहने वाले हनोक तार उर्फ पीटर से बरामद ड्रग्स खरीदी थी।
इस खुलासे के आधार पर हनोक तार उर्फ पीटर को 6 मई को तिलक नगर इलाके से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि उसके फ्लैट में कुछ मेथमफेटामाइन पड़ा है। जांच में यह भी पता चला कि गिरफ्तार किए गए ड्रग सप्लायर बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। यास्मीन टूरे ने खुलासा किया है कि वह मार्च, 2024 में पर्यटक वीजा पर भारत आई थी, लेकिन वह कोई यात्रा दस्तावेज नहीं दिखा सकी, जबकि हनोक टैर उर्फ पीटर ने खुलासा किया है कि वह मार्च, 2023 में बिजनेस वीजा पर भारत आया था, लेकिन वह भी कोई यात्रा दस्तावेज नहीं दिखा सका।