सिग्नल, ट्रैक सेंसर और सैटेलाइट की बदौलत दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन पर सोमवार को चालक रहित मेट्रो दौड़ने लगी। यात्रियों की सेवा के लिए स्लीप मोड से महज 10 मिनट में मेट्रो उपलब्ध होगी। सेवाएं समाप्त होने पर मेट्रो खुद डिपो में पहुंचकर स्लीप मोड में चली जाएगी।
चालक रहित मेट्रो की शुरुआत से दक्षिण पश्चिम दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और नोएडा के बीच यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी। खास तौर पर नौकरीपेशा लोगों को राहत मिलेगी। उन्हें न तो देर होने और न ही सुरक्षा संबंधी चिंता रहेगी। डीएमआरसी ने दावा किया है कि मानवीय हस्तक्षेप न होने की वजह से दिल्ली-एनएसीआर के यात्रियों को चालक रहित मेट्रो में आरामदायक सफर का मौका मिल सकेगा।
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक इस ट्रेन में कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) और ऑटोमेटिक ट्रेन सुपरविजन (एटीएस) जैसी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे मेट्रो को बगैर चालक ही पटरी पर दौड़ाने का सपना सच हुआ। पहले विदेश में ही ऐसी तकनीक थी, लेकिन सीबीटीसी पूर्णत: स्वदेश में विकसित तकनीक है। इसके जरिए सैटेलाइट से सिग्नल प्रणाली के साथ ट्रैक सेंसर भी ट्रेन की तमाम गतिविधियों को कंट्रोल रूम तक पहुंचाएंगे ताकि यात्रियों को निर्बाध सेवा मिल सके।
ड्राइवरलेस मेट्रो का परिचालन शुरू करने से पहले सभी तकनीकी पहलुओं का गहन अध्ययन करने के बाद नई तकनीक का समावेश मेट्रो में किया गया। फिलहाल, मजेंटा और पिंक लाइन पर नई तकनीक उपलब्ध हैं, इसलिए अगले साल जून तक पिंक लाइन पर भी चालक रहित मेट्रो दौड़ने लगेगी।
फिलहाल पांच-छह मेट्रो ही दौड़ेंगी
मेंजेंटा लाइन पर फिलहाल 26 मेट्रो ट्रेनें हैं। शुरुआत में सभी ट्रेनें चालक रहित मेट्रो नहीं होगी। पांच से छह मेट्रो में ही यह सुविधा होगी, जिनकी बाकायदा उदघोषणा भी की जाएंगी। चालक रहित मेट्रो में यात्रियों की सहायता या किसी भी आपात स्थिति के लिए मेट्रो के अंदर रोमिंग अटेंडेंट होंगे। यात्री को कोई परेशानी आती है तो इसका तत्काल हल निकालने में मदद करेंगे। जरूरत हुई तो कंट्रोल रूम से भी मदद ले सकते हैं।
अलार्म की भी होगी सुविधा
यात्रियों को मेट्रो के अंदर कोई परेशानी होती है तो अलॉर्म की सुविधा है। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं ताकि अलार्म ऑन करते ही, सीधे कंट्रोल रूम से आपका संपर्क हो सके। सेहत संबंधी कोई जरूरत या किसी भी तरह की परेशानी होती है तो तत्काल, कंट्रोल रूम से सहायता दी जाएगी।
तकनीकी विशेषताएं
. ड्राइवर की कैब में लगे स्क्रीन पर रफ्तार, स्टेशन की दूरी सहित तमाम तकनीकी जानकारियां फ्लैश होती रहेंगी। सीसीटीवी कैमरे, सेंसर और सेटेलाइट की मदद से स्क्रीन के साथ-साथ तमाम जानकारियां ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर पर दिखेंगी। जरूरत के मुताबिक कर्मी इसे नियंत्रित करेंगे ताकि सेवाएं निर्बाध जारी रह सकें। अभी तक ड्राइवर का संपर्क कंट्रोल सेंटर से रहता था।
.रास्ते में कोई बाधा या रुकावट आए तो ट्रैक सेंसर इसकी जानकारी देगा। सूचना मिलते ही मेट्रो में मौजूद अटेंडेंट, इसे दुरस्त करेंगे। फिर भी अगर देरी होती है तो दूसरी मेट्रो यात्रियों की सेवा में उपलब्ध रहेगी।
. पहले से फीड किए गए वक्त पर ही मेट्रो स्टेशन पर पहुंचेगी। प्रमुख स्टेशनों पर पीक आवर्स के दौरान यात्रियों की भीड़ के मुताबिक मेट्रो के रुकने और दरवाजे खुलने का वक्त तय होगा। इसके मुताबिक ही यात्रियों की सेवाएं मिलेंगी।
. किसी भी जगह मेट्रो में कोई तकनीकी समस्या आ जाती है, जिसे दुरस्त करने में वक्त लगेगा तो कंट्रोल रूम में इसकी जानकारी फीड करते ही तत्काल दूसरी मेट्रो पहुंच जाएगी। इससे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में देरी नहीं होगी। इसके बाद भी देरी हो जाती है तो रफ्तार में भी जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे ताकि यात्रियों को असुविधा न हो।