फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: दिल्ली में बिना बाउंड्रीवॉल के नाले बने जान की आफत

विज्ञापन
विज्ञापन
- नोएडा में इंजीनियर की मौत के बाद राजधानी के नालों की सुरक्षा पर सवाल
विज्ञापन

-अदालतों की फटकार के बावजूद नहीं सुधरी नालों की हालत

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नोएडा में मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरकर एक इंजीनियर की मौत की घटना ने दिल्ली में नालों और खुले सीवर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी के कई इलाकों में भी बड़े नाले बिना बाउंड्री वॉल के खुले पड़े हैं, जबकि कई स्थानों पर बनी बाउंड्री भी जर्जर है। यह राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों की जान के लिए आफत बन गए हैं।
दिल्ली में सीलमपुर, ब्रह्मपुरी, जाफराबाद, मौजपुर, गोकुलपुरी, रामनगर और जगजीवन नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरने वाले नालों की बाउंड्री टूटी है। गाजीपुर, वेलकम और शाहदरा ड्रेन के कई हिस्सों में न तो बाउंड्रीवॉल है और न ही सुरक्षा रेलिंग। कई जगहों पर दीवारें टूटी हुई हैं, जिनकी मरम्मत लंबे समय से नहीं की गई। रात के समय पर्याप्त रोशनी न होने से खतरा और बढ़ जाता है।
विज्ञापन


दो साल में डूबने से हुई 59 लोगों की मौत
राजधानी में संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के चलते बीते दो साल में अलग-अलग स्थानों पर डूबने से 59 लोगों की मौत हो चुकी है। इन मौतों में खुले नाले, सीवर, जलभराव वाले अंडरपास और सड़कों पर भरा पानी मुख्य कारण रहा है। मॉनसून के दौरान नालों में पानी का बहाव तेज हो जाता है। ऐसे में बाउंड्रीवॉल नहीं होने से नाले में गिरने का खतरा बढ़ जाता है। कई जगहों पर अस्थायी लकड़ी या टिन की चादरें लगाकर खानापूर्ति कर दी गई हैं।


अदालत की फटकार के बाद नहीं सुधरे हालात
दिल्ली हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए कई बार नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को फटकार लगा चुके हैं। अदालतों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नालों की नियमित सफाई, मरम्मत, मजबूत बाउंड्री वॉल का निर्माण, ढक्कन लगाने और चेतावनी संकेत सुनिश्चित किए जाएं। इसके बावजूद हालात जस के तस हैं।

पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
2024 में गाजीपुर नाले में गिरने से मां और बेटे की मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। इसके अलावा राजेंद्र नगर एक्सटेंशन इलाके में खुले नाले में डूबकर 13 वर्षीय बच्चे की जान चली गई थी। ऐसी घटनाओं के बाद कुछ दिनों तक प्रशासन हरकत में रहता है। निरीक्षण होते हैं और नोटिस जारी किए जाते हैं। कुछ समय बाद ही नालों की मरम्मत और सुरक्षा उपायों का काम फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है।

नालों पर अवैध निर्माण भी बड़ी समस्या

कई जगहों पर नालों के किनारे अवैध निर्माण हैं, जिससे बाउंड्री वॉल बनाना या मरम्मत करना मुश्किल हो जाता है। वहीं, नालों में कचरा, प्लास्टिक और मलबा जमा होने से जल निकासी बाधित होती है और बारिश के दौरान पानी सड़क पर फैल जाता है, जिससे हादसों की आशंका बढ़ जाती है।
विज्ञापन


ये हो सकता है समाधान
सभी बड़े और छोटे नालों पर मजबूत बाउंड्री वॉल, स्टील रेलिंग और ढक्कन लगाने चाहिए। खतरनाक स्थानों पर चेतावनी संकेत और रिफ्लेक्टर अनिवार्य हों। मानसून से पहले विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें