अधिकारी और राजनेता ज्यादातर व्यस्त रहते हैं। ऐसे में कई बार आयोजनों के लिए अपना समय देकर या तो भूल जाते हैं, या फिर पहुंच ही नहीं पाते।
इससे परे देश का एक नायक ऐसा भी रहा, जिसने अपना वादा दो साल बाद पूरा किया। दिवंगत राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने दो साल तक अपना वादा याद रखा और वह बुलंदशहर पहुंचे।
निर्मला कान्वेंट स्कूल प्रबंधन ने अपने वार्षिकोत्सव पर डा. कलाम को आमंत्रित किया था। सिस्टर ने उनसे कहा था कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे आपसे मिलना चाहते हैं।
उस समय उनके पास समय नहीं था। उन्होंने बड़ी विनम्रता से भविष्य में आने का वादा कर दिया। इस बात को विद्यालय का प्रबंधन भी भूल गया।
ऐसा ही हुआ जब दो साल बाद डीएम आफिस पर इमरजेंसी मैसेज आया कि अगले दिन डा. कलाम निर्मला कान्वेंट स्कूल में पहुंच रहे हैं। स्कूल प्रबंधन को तो जैसे विश्वास ही नहीं हुआ।
अगले दिन ठीक समय पर वह विद्यालय पहुंचे। स्कूल तालियों से गूंज उठा जब माइक पर पहुंचते ही उन्होंने कहा ...सिस्टर, आई रिमेंबर माई प्रोमिस।
उन्होंने कहा कि मुझको स्कूल बच्चों की याद आती रही... उनसे मिलना जो था। ये देश का भविष्य और हमारी आशाओं का आधार है, कहीं निराश न हो जाए।
आज जब वह हमको छोड़कर चले गए ... तब उनका यह व्यवहार युवाओं को बड़े लोगों का अर्थ समझाने का प्रयास कर रहा है।