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DPS Dwarka : शिक्षा निदेशालय के आदेश की नाफरमानी, 32 बच्चों को नहीं मिली एंट्री; अब बाउंसर भी तैनात

Sat, 17 May 2025 07:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

शिक्षा निदेशालय की ओर से 32 बच्चों को स्कूल में एंट्री दिए जाने के आदेश के बावजूद शुक्रवार को बच्चों को स्कूल में नहीं जाने दिया गया।
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file pic - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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द्वारका स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में फीस बढ़ोतरी को लेकर गहराया विवाद बढ़ता जा रहा है। शिक्षा निदेशालय की ओर से 32 बच्चों को स्कूल में एंट्री दिए जाने के आदेश के बावजूद शुक्रवार को बच्चों को स्कूल में नहीं जाने दिया गया।

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इतना ही नहीं स्कूल के बाहर बाउंसर भी तैनात किए गए। अभिभावकों को पीटीएम (पैरेंट्स टीचर्स मीटिंग) में जाने की इजाजत नहीं मिली। शिक्षा निदेशालय ने बृहस्पतिवार को ही इन बच्चों को स्कूल में लेने का आदेश दिया था।

दरअसल स्कूल ने फीस नहीं भरने पर इन 32 स्कूल के नाम काट दिए गए हैं। इस पर निदेशालय ने इन बच्चों को स्कूल में लेने का आदेश दिया था लेकिन स्कूल ने ऐसा नहीं किया। अभिभावक स्कूल के इस रवैये को शिक्षा निदेशालय के आदेश की अवहेलना के तौर पर देख रहे हैं।
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अभिभावकों का कहना है कि स्कूल ने 32 बच्चों को स्कूल में घुसने से रोक दिया गया। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल के गेट पर महिला और पुरुष बाउंसर तैनात किए गए थे।

शिक्षा निदेशालय के आदेश के बाद जब अभिभावक शुक्रवार सुबह बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे थे शिक्षकों और सुरक्षा कर्मियों ने बिना कोई कारण बताए उन्हें अंदर जाने नहीं दिया और वापस भेज दिया।

अभिभावक विनय राजपूत ने बताया, स्कूल किसी आदेश को नहीं मान रहा है। बाउंसर खड़े करके अभिभावकों को डराने का प्रयास किया जा रहा है। 10 बजे के आसपास शिक्षा निदेशालय के प्रतिनिधि के आने के बाद ही तीन से चार बच्चों को अंदर बुलाया गया।  

स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप से भी अभिभावकों को हटा दिया गया है। विनय राजपूत ने बताया, इतना ही नहीं बच्चों को जो प्राइवेट वैन लेकर स्कूल आती है, उन्हें भी बच्चों को लाने से मना कर दिया गया है। वहीं, पीटीएम में भी जाने नहीं दिया गया।

शनिवार व रविवार को अवकाश और सोमवार से ग्रीष्मकालीन अवकाश हो रहे हैं। इस कारण से जब बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे तो उन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान मिलने वाले होमवर्क का भी पता नहीं चल पा रहा। फिलहाल इस मामले पर स्कूल ने अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

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