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Delhi : एनजीटी के आदेश का पालन न करने पर डीपीसीसी को कार्रवाई के आदेश, पर्यावरण नियमों का हो रहा है उल्लंघन

Sun, 22 Dec 2024 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन राजपूत, नई दिल्ली

सार

रोहिणी सेक्टर-7 से जुड़ा एक मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सामने आया है। इसमें शिकायतकर्ता ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि अदालत के पिछले आदेश का पालन नहीं हुआ है।
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एनजीटी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बढ़ते प्रदूषण के बीच पर्यावरण से जुड़े नियम-कायदों का उल्लंघन हो रहा है। रोहिणी सेक्टर-7 से जुड़ा एक मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सामने आया है। इसमें शिकायतकर्ता ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि अदालत के पिछले आदेश का पालन नहीं हुआ है। याचिका में दावा किया गया है कि अनधिकृत कार वर्कशॉप और कार मेकेनिक सर्विसिंग, मरम्मत, डेंटिंग और पेंटिंग, कबाड़ डीलिंग का कार्य अभी भी जारी है। ऐसे में अदालत ने सख्त रवैया अपनाते हुए याचिकाकर्ता को डीपीसीसी के सदस्य सचिव के पास शिकायत करने के लिए कहा है। यही नहीं, अधिकरण ने निर्देश दिए हैं कि मामले में डीपीसीसी उचित कार्रवाई करे।

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एनजीटी को रोहिणी सेक्टर-7 में स्थित भगवान राम मंदिर परिसर के पास अनधिकृत कार वर्कशॉप और कार मेकेनिक की ओर से सर्विसिंग, मरम्मत, डेंटिंग और पेंटिंग, कबाड़ डीलिंग समेत अन्य गतिविधियों की शिकायत मिली थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि इन कार्यों के चलते वायु, ध्वनि व जल प्रदूषण हो रहा है। 4 अक्तूबर 2018 को याचिका का निपटारा करते हुए आदेश दिया पारित किया। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि अधिकरण ने पहले ही मामले की जांच कर ली है। ऐसे में आवश्यक कार्रवाई डीपीसीसी के सदस्य सचिव की ओर से पर्यावरण मानदंडों का अनुपालन करने के संबंध में होनी है।

डीपीसीसी, एमसीडी की ले सकती है सहायता
अधिकरण को याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि आवेदक ने 27 जून 2023 को एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर को शिकायत दर्ज कराई थी। डीपीसीसी के सदस्य सचिव को ऐसी कोई नई शिकायत नहीं बताई गई। ऐसे में अदालत ने आवेदक को निर्देश दिया कि वह सभी सहायक सामग्रियों के साथ डीपीसीसी के सदस्य सचिव को शिकायत दर्ज कराएं। पीठ में विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल भी मौजूद रहें। अदालत ने कहा कि मामले में डीपीसीसी पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन की सीमा व इससे जुड़े लोगों के बारे में पता लगाएंगी। कार्रवाई करने के दौरान डीपीसीसी, एमसीडी की सहायता ले सकती हैं।
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ओखला पक्षी अभयारण्य में अवैध निर्माण के निरीक्षण के निर्देश
नोएडा के ओखला पक्षी अभयारण्य के अंदर किसी भी प्रकार का अनाधिकृत निर्माण कार्य होने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह स्थल की निरीक्षण कर रिपोर्ट दें। रिपोर्ट आठ सप्ताह के अंदर देनी होगी। अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें दावा किया गया था कि संबंधित प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) अभयारण्य के अंदर अवैध स्थायी संरचनाओं का निर्माण कर रहा है, जो यमुना नदी के डूब क्षेत्र में 
स्थित है। 

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने जवाब दाखिल किया था कि अभयारण्य के अंदर एक सड़क का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन परियोजना को बंद कर दिया गया और उसे ध्वस्त कर दिया गया। अधिकरण ने प्राधिकरण के वकील की दलीलों पर गौर किया, जिसके अनुसार अभयारण्य के अंदर कोई अनुचित स्थायी निर्माण नहीं था। 

फरीदाबाद में ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण मामले में अधिकारियों को नोटिस
एनजीटी ने फरीदाबाद में हरित पट्टियों पर कथित अतिक्रमण और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए पर्यावरण मुआवजा (ईसी) लगाने के संबंध में नोटिस जारी किया है। अदालत ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एचएसवीपी, नगर निगम, उपायुक्त, केंद्रीय भूजल बोर्ड और हरियाणा के मुख्य सचिव के कार्यालय से जवाब मांगा है। अधिकारियों को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, वहीं सुनवाई की अगली तारीख 27 मार्च तय की गई है। 

अदालत ने यह आदेश स्थानीय निवासी नरेंद्र सिरोही का तरफ से दायर याचिका के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने शहर के विभिन्न हिस्सों में ग्रीन बेल्ट पर कथित अतिक्रमण को लेकर चिंता जताई है। दावा किया गया है कि अतिक्रमण के कारण प्रदूषण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। एनजीटी अधिनियम, 2010 की धारा 14, 15, 16 और 17 के तहत दायर आवेदन में अतिक्रमणों को तत्काल हटाने और हरित पट्टियों को बहाल करने व प्रतिवादियों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाने के निर्देश जारी करने की मांग की गई है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों से अपेक्षित अनुमति के बिना हरित पट्टियों पर शराब, शराब की दुकानें और अहाते खुल गए हैं। 

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