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संकट के सिपाही: परिवार के सहयोग की ‘डोज’ योद्धाओं के हौसले को नहीं पड़ने दे रही कमजोर

Sat, 25 Apr 2020 06:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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उन्नाव में एक पुलिसकर्मी पूजा पाल अपने एक साल के बेटे के साथ ड्यूटी पर... - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना से जंग लड़ रहे योद्धा इसलिए मनोयोग से मरीजों की सेवा कर पा रहे हैं, क्योंकि उनका परिवार उनके साथ है। किसी के पिता तो किसी की पत्नी लगातार हिम्मत दे रहे हैं, तो किसी के बच्चे कह रहे हैं, आपकी जरूरत इस समय देश को है। कई दंपती तो रिश्तेदारों के सहारे ही अपने बच्चों को छोड़कर ड्यूटी कर पा रहे हैं।
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 मैं सिपाही, होने वाले पति डॉक्टर, दोनों ड्यूटी पर, टाली शादी
दो साल पहले पुलिस फोर्स जॉइन करने वालीं ममता ने कभी नहीं सोचा था कि इन हालातों में उनको ड्यूटी करनी होगी। कभी महिला थाने की हेल्प डेस्क तो कभी जिले की सीमाओं पर तैनाती मिली। वह मानती हैं कि इस वक्त ड्यूटी लंबी और सख्त हो गई है। लेकिन कोरोना योद्धा होना आसान नहीं। जबतक हम कोरोना के खिलाफ यह जंग नहीं जीत लेते तब तक आराम से नहीं बैठेंगे। इसीलिए मैंने 24 मई को प्रस्तावित अपनी शादी को टाल दिया है। हालांकि लॉकडाउन की अवधि तीन मई है, लेकिन युद्ध तो जारी रहेगा। पति डॉक्टर हैं। वह भी मरीजों की सेवा में लगे हैं। वह अच्छे से समझते हैं, मैंने अपने ससुराल वालों को शादी की तिथि आगे बढ़ाने को समझाया तो वह मान गए। खुशियों से कहीं बड़ा फर्ज है।

(ममता, सिपाही, हरदोई)
 
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पत्नी बीमार, फिर भी  जंग को तैयार

खेम सिंह की पत्नी हेमा रावत पिछले लगभग 5 वर्षों से मानसिक रोग से पीड़ित हैं। कोरोना वायरस के चलते वह दो माह पूर्व अपनी ड्यूटी पर लौट आए थे। उन्होनें बताया कि  कभी-कभी तो पत्नी की हालत ऐसी बन जाती है कि खुद बच्चों को ही भोजन बनाना पड़ता है। वह दिन में ड्यूटी करने के बाद  रात को 275 किलोमीटर दूर बरेली रह रही पत्नी की हालत मोबाइल कॉल कर जानते हैं। कभी-कभी जब वह अधिक डिप्रेशन में हो जाती हैं तो उन्हें पूरी रात उन्हें समझाने में बीत जाती है। कभी-कभी तो पत्नी और बच्चों को समझाना उन्हें बड़ा कठिन हो जाता है। खेम सिंह कहते हैं कि आज वह अपने दुख के सामने देश के हर नागरिक के दुख को अहमियत दे रहे हैं।

(खेम सिंह रावत, फार्मासिस्ट, मुजफ्फरनगर)
 

दंपती ड्यूटी पर, नानी करतीं बच्चों की निगरानी

कुशीनगर जिले के साखोंपार गांव के रहने वाले सुशील श्रीवास्तव टीबी रोग अस्पताल में हेल्थ सुपरवाइजर एवं उनकी पत्नी नीलम श्रीवास्तव स्टॉफ नर्स के पद पर निचलौल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात हैं। नीलम जगदौर में भर्ती कोरोना मरीजों का इलाज करने के बाद इन दिनों क्वारंटीन में हैं तो दूसरी ओर पति सुशील  हेल्थ सुपरवाइजर होने के कारण मरीजों में दवा वितरण कर अपनी जिम्मेदारी को निभाने में लगे हैं। एक ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दोनों लोगों की तैनाती के कारण नगर के लोहिया वार्ड में किराए के मकान में रहते हैं। बच्चों की देखभाल करने के लिए उनकी नानी आई गई हैं। बच्चें उन्हीं के पास रहते हैं।

(सुशील, नीलम, सीएचसी, महराजगंज)
 
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परिवार को छोड़ अस्पताल में डटे

डॉ. अमित कुमार की वर्तमान में ड्यूटी कोविड-19 अस्पताल खेकड़ा में लगाई गई है। वह दिन में कई-कई बार मरीजों से बात कर उनकी समस्या के बारें में पूछकर उसका समाधान कराते हैं। डॉ. अमित कुमार की पत्नी डॉ. नवनीत कौर चंडीगढ़ में डिफेंस में कार्यरत हैं। दंपती ड्यूटी पर हैं तो उनके बच्चे माता-पिता के साथ मेरठ के प्रभात नगर में रहते हैं। वह नौ अप्रैल के बाद से अपने बच्चों और परिजनों से नहीं मिले हैं। ड्यूटी चार्ट और कोरोना क्वारंटीन के नियमों का पालन करते हुए अब 12 मई के बाद ही बच्चों और माता-पिता से मिलना होगा।

(डॉ. अमित कुमार, बागपत)
 
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